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डेस्क रिपोर्टर
भोपाल, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। कोरोना नाम का शब्द सबकी जिंदगी में एक अज्ञात शत्रु की तरह आया है। इस दुश्मन को हम देख नहीं सकते हैं लेकिन महसूस जरूर कर रहे हैं। इस नाम की बीमारी ने देश ही नहीं पूरी दुनिया के कदमों को थाम दिया था। पहली और दूसरी लहर में इस बीमारी ने जो तबाही मचाई थी वो याद करके आज भी रूह कांप जाती है। हर दिन कई हजार मौतों का मंजर आंखों के सामने लोगों ने देखा है। इस बीमारी का असर हर फील्ड में महसूस किया गया है। वो चाहे होटल हों, पर्यटन का क्षेत्र हो या फिर शिक्षा और स्कूल से जुड़ा हुआ क्षेत्र हो। कोरोना संक्रमण के कारण पढ़ाई तो प्रभावित हुई ही है। छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप पर भी इसका गहरा असर पड़ा है।
स्कॉलरशिप न मिल पाने का कारण
कोरोना के कहर के चलते सरकार के खजाने में पैसों की मात्रा थोड़ी कम हो गई है। धीमे-धीमे व्यापार और रिवेन्यू पटरी पर आ रहा है। जिसके बाद से सरकारी खजाने को भी भरने में मदद मिल रही है। बजट कम होने के चलते अभी केवल सरकारी कॉलेजों के ओबीसी छात्रों को स्कॉलरशिप जारी हो चुकी है। निजी कॉलेजों को स्कॉलरशिप बजट मिलने के बाद जारी की जाएगी। कई छात्र अपनी पढ़ाई स्कॉलरशिप के दम पर करते हैं लेकिन उनको अब फीस देने में समस्या आ रही है।
स्कॉलरशिप देने में आता है कितना खर्च
स्कॉलरशिप के लिए सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों और स्कूलों को मिलाकर लगभग 800 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत होती है। लेकिन सरकार ने अभी तक ओबीसी स्कॉलरशिप के लिए केवल 500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। सरकार के खजाने में ओबीसी छात्रों की स्कॉलरशिप देने के लिए राशि मौजूद नहीं हैं। इस समस्या के चलते सरकार ने इंजीनियरिंग, फॉर्मेसी, मेडिकल, नर्सिंग सहित अन्य कोर्स के छात्रों की स्कॉलरशिप पर रोक लगा दी है।
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