
रायपुर। विकासखंड सिमगा के कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा स्थित सदगुरुदेव कबीर आश्रम में कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में चल रहे ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान सन् 1700 ईस्वी की (326 वर्ष पुरानी) हस्तलिखित पाण्डुलिपियां प्राप्त हुई हैं। ये पाण्डुलिपियां न केवल धार्मिक दृष्टि से अमूल्य हैं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रमाण भी हैं।
दामाखेड़ा में कुल चार प्राचीन ग्रंथों- ‘अनुरागसागर, अम्बूसागर, दीपकसागर और ज्ञान प्रकाश’ का सर्वेक्षण कर सरपंच की उपस्थिति में ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटलीकरण पूरा किया गया। ये सभी ग्रंथ 9वें आचार्य प्रगट नाम साहब की ओर से लिखित हैं और देवनागरी लिपि में हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि किसी के पास कोई भी हस्तलिखित प्राचीन ग्रंथ, ताम्रपत्र या ताड़पत्र हो तो वे सर्वे टीम को सूचित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य में मूल प्रति स्वामी के पास ही रहेगी, केवल फोटो लेकर अपलोड किया जाएगा।
‘ज्ञानभारतम’ अभियान का उद्देश्य भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित करना है। कलेक्टर ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया है।
शहीद वीर नारायण सिंह के फांसी के आदेश की पाण्डुलिपि भी प्राप्त हुई
इस अभियान की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि यह रही कि सोनाखान संग्रहालय में 10 दिसम्बर 1857 को अंग्रेजी सरकार की ओर से जारी शहीद वीर नारायण सिंह के फांसी के आदेश की पाण्डुलिपि भी प्राप्त हुई है। यह दस्तावेज़ छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की शहादत का अनमोल ऐतिहासिक साक्ष्य है।
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