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छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को मिला है नेतृत्व का अवसर: विष्णुदेव साय

13 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को मिला है नेतृत्व का अवसर: विष्णुदेव साय
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है। इसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा व समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी।




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