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छत्तीसगढ़: यूरिया वितरण की 80 प्रतिशत सीमा समाप्त, समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश

03 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
छत्तीसगढ़: यूरिया वितरण की 80 प्रतिशत सीमा समाप्त, समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने यूरिया वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के बराबर खरीफ 2026 में भी यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पूर्व लागू 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त कर दी गई है, जिससे किसानों को खेती के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।


जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने दुलदुला स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति का निरीक्षण कर खाद-बीज की उपलब्धता, कृषि ऋण वितरण और किसानों को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने किसानों को नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी समय समिति में यूरिया का स्टॉक कम होने के कारण पूरी पात्रता के अनुसार उर्वरक नहीं मिल पाता है, तो स्टॉक उपलब्ध होते ही शेष मात्रा भी किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसानों को उर्वरक की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।


निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सहकारी समिति में उपलब्ध खाद-बीज के भंडारण, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से वितरित कृषि ऋण तथा किसानों को दी जा रही सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण समय पर उपलब्ध कराया जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। कलेक्टर ने समिति में पहुंचे किसानों से सीधे संवाद कर खेती की तैयारियों, उर्वरकों की उपलब्धता व कृषि संबंधी समस्याओं की जानकारी ली। 


नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील

कलेक्टर रोहित व्यास ने किसानों से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है, लागत में कमी आती है और भूमि की उर्वरता भी संरक्षित रहती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि कर सकते हैं। कलेक्टर ने सभी सहकारी समितियों में खाद एवं बीज की उपलब्धता पर नियमित निगरानी रखने तथा किसानों को उर्वरक, बीज एवं कृषि ऋण उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कठिनाई न होने देने के निर्देश दिए।


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