
रायपुर। सशस्त्र नक्सलवाद से छत्तीसगढ़ की मुक्ति के बाद उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा रविवार को पहली बार अपने विधानसभा क्षेत्र कवर्धा पहुंचे। यहां पर स्थानीय महामाया चौक में कवर्धा के लोगों ने गृहमंत्री का भव्य अभिनंदन किया। हजारों की संख्या में लोग बाजा-गाजा, ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल हुए।
सभी को गर्व था कि कभी नक्सल प्रभावित कबीरधाम जिले के साथ अब पूरे छत्तीसगढ़ से भय और आतंक को दूर करने में उनके अपने माटी पुत्र का बड़ा योगदान रहा है। कार्यक्रम में ब्राह्मण, यादव, ठाकुर, कुर्मी, साहू, सतनामी, निर्मलकर, गुप्ता, अहिरवार, लोधी, पटेल, गोंड, केसरवानी गुप्ता, सेन, गंधर्व, स्वर्णकार, जैन, वैष्णव सहित सभी समाजों ने भव्य रैली का स्वागत किया। असंभव से लगने वाले लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी।
स्थानीय जिला प्रेस क्लब, यूथ क्लब, हरीतिमा परिवार, प्राइवेट स्कूल संघ, नाथ योगी समाज, फाइटर क्लब, जिला क्रिकेट संघ, ज्वाइन हैंड ग्रुप, ट्रक मालिक संघ, पतंजलि योग समिति, सीनियर सिटीजन समिति और भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने भी शामिल होकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर सभी ने गृह मंत्री विजय शर्मा को लड्डुओं से तौलकर उनका सम्मान किया।
नक्सल अभियान में शहीद हुए अमर जवानों को श्रद्धांजलि दी
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गायत्री मंदिर और गुरुद्वारे में जाकर प्रदेश की शांति और समृद्धि की प्रार्थना की और लोगों के साथ भारतमाता चौक पर नक्सल अभियान में शहीद हुए अमर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वह सभी के प्रेम से अभिभूत हैं। उन्हें नहीं पता था कि वह सभी नक्सल समस्या को इतनी गंभीरता से समझते हैं। यह वास्तव में अत्यंत संवेदनशील विषय रहा है, और जो लोग इससे पीड़ित रहे हैं, उनकी पीड़ा को शब्दों में समझा भी नहीं जा सकता। माओवाद एक आयातित विचार है, जिसका उद्देश्य केवल बंदूक की नली से सत्ता स्थापित करना रहा है, जबकि भारत का लोकतंत्र प्राचीन काल से ही सशक्त रहा है, जिसकी झलक आज भी बस्तर के समाज में दिखाई देती है।
जब केंद्रीय गृह मंत्री संकल्प लेते हैं, तो वह तय समय में पूरा होता है
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोले-भाले लोगों को बहलाकर उनके हाथों में बंदूक थमा दी गई। स्कूल, सड़क और तालाबों के किनारे बारूद बिछाए गए। शिक्षा दूत, सुरक्षा कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, शासकीय कर्मचारी और निर्दोष ग्रामीणों तक की निर्मम हत्या की गई। सैकड़ों लोग इन विस्फोटों में अपंग हो गए, उनके मानवाधिकारों की रक्षा कौन करेगा? जब बस्तर के ऐसे पीड़ितों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, तब उन्होंने संकल्प लिया था कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त किया जाएगा और जब गृह मंत्री संकल्प लेते हैं, तो वह तय समय में पूरा होता है।
शस्त्र छोड़ने वालों के लिए लाल कारपेट बिछाकर स्वागत किया
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने शस्त्र छोड़ने वालों के लिए लाल कारपेट बिछाकर स्वागत किया और उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की। हमने संवाद के लिए वीडियो कॉल तक को माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि आज बस्तर के गांवों में लोग अपने आंगन में खुलकर हंस रहे हैं। अब वहां डर नहीं, विकास की बातें हो रही हैं। गांवों के मेले और बाजारों में रौनक लौट आई है, यह बदलाव ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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