
भोपाल। नीति आयोग ने राजधानी के एक निजी होटल में फॉस्टरिंग मेंटरशिप इन एजुकेशन: ए पाथवे टू इक्विटी विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट होना व्यक्तिगत हानि के साथ राष्ट्र की क्षमता का नुकसान है। हमें डेनोमिनेटर पर फोकस करना होगा, न कि अपवादों पर।
डॉ. वीके पॉल ने ड्रॉपआउट दरों के चिंताजनक आंकड़ों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्कूल में 93 प्रतिशत एनरॉलमेंट है। अपर प्राइमरी में तीन प्रतिशत बच्चे छूट जाते हैं। सेकेंडरी में 56 प्रतिशत और 12वीं में मात्र 23 प्रतिशत बच्चे पहुंचते हैं। 2019 से 2023 तक सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में 15,000 ओबीसी/एससी/एसटी छात्र छोड़कर चले गए, जबकि आईआईटी और आईआईएम में कुल 4,000 से अधिक ड्रॉपआउट हुए।
कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना को साकार करते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए मेंटरशिप की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श करना था। कार्यशाला में शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने और ड्रॉपआउट दरों को कम करने की दिशा में विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और स्टेकहोल्डर्स ने अपने अनुभव साझा किए।
मौका मिलना भाग्य है, पर हम भाग्य पर निर्भर नहीं रह सकते
डॉ. पॉल ने कहा कि मौका मिलना भाग्य है, लेकिन हम भाग्य पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारा देश मानव-केंद्रित सोच और दर्शन से समृद्ध है। क्या हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां हर बच्चे का मेंटरशिप हो? एनईपी 2020 हमें रास्ता दिखाती है। मेंटरशिप से व्यक्तिगत मार्गदर्शन, आत्मविश्वास, जीवन कौशल विकास और सुरक्षित संवाद का वातावरण मिलता है। हमें शिक्षकों का माइंडसेट बदलना होगा, छात्रों को मजबूत बनाना होगा और टेक्नोलॉजी से डायरेक्ट पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। विषाक्त वातावरण, ड्रग्स जैसी समस्याएं ड्रॉपआउट बढ़ाती हैं। यह मानवाधिकार है - हर बच्चा माइंड, स्किल, कॉन्फिडेंस से लैस होकर नई चुनौतियों का सामना कर सके।
शिक्षा में मेंटरशिप की भूमिका को सामाजिक न्याय की दृष्टि से महत्वपूर्ण: ओपी चौधरी

वित्त, वाणिज्य कर, आवास, पर्यावरण, योजना, आर्थिक और सांख्यिकी मंत्री ओपी चौधरी ने शिक्षा में मेंटरशिप की भूमिका को सामाजिक न्याय की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मेंटरशिप यानी मार्गदर्शन और प्रेरणा की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। आज की यह कार्यशाला तीन मुख्य भागों में विभाजित हैै। पहला सत्र स्कूल शिक्षा में मेंटरशिप पर केंद्रित, दूसरा उच्च शिक्षा में इसकी भूमिका पर और तीसरा कौशल विकास पर। यह राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में समानता के लिए एक साझा ढांचा तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है, जो विकसित भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा।
छत्तीसगढ़ की औसत आयु मात्र 24 वर्ष
मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकीय ताकत पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश की औसत आयु 28 वर्ष है, लेकिन छत्तीसगढ़ की औसत आयु मात्र 24 वर्ष है। यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि दुनिया के 20 प्रतिशत युवा भारत में रहते हैं। लेकिन यदि हम इन युवाओं को उचित शिक्षा, कौशल और आत्मविश्वास नहीं दे पाए, तो यह डेमोग्राफिक डिविडेंड एक डिजास्टर बन सकता है। हमें युवाओं को अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, ताकि वे विकसित भारत का निर्माण कर सकें।
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