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पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं वन अधिकारी: रमेन डेका

20 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं वन अधिकारी: रमेन डेका
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से शनिवार को छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा-2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने लोक भवन में मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वन अधिकारियों के पास कानून, संसाधन और अधिकार उपलब्ध हैं। इनका प्रभावी उपयोग कर वे पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। 


राज्यपाल ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि पर्यावरण संरक्षण व जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप भूकंप, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता है। इसलिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू व छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।


मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का आधार 

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि मानव, पशु और  प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का आधार है। उन्होंने अधिकारियों से इस दिशा में शोध और नवाचार करने का आह्वान किया। साथ ही ऐसे उपाय विकसित किए जाने की अपेक्षा की जिससे नदियों में जल प्रवाह सतत बना रहे, उनकी क्षमता बढ़े, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और आवश्यक मात्रा में रेत भी प्राप्त होती रहे। राज्यपाल ने वन अधिकारियों से कहा कि वे जंगलों के प्रति लगाव उत्पन्न करें, इससे उन्हें जंगलों को समझने में आसानी होगी और वे अपने दायित्वों का निर्वाह अच्छे से कर सकेंगे।


एक पेड़ मां के नाम” अभियान को गंभीरता से किया जाना चाहिए लागू

राज्यपाल ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। कई स्थानों पर पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट का घेरा बना दिया जाता है, जिससे उनके विकास में बाधा आती है और वर्षा जल का भू-जल स्तर में समुचित पुनर्भरण नहीं हो पाता। ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वन अधिकारियों का कार्य  कार्यालय में बैठना नहीं है  बल्कि जंगलों में भ्रमण कर  वनवासियों की समस्याओं को समझना और वनों के संरक्षण व संवर्धन के लिए नवाचारपूर्ण उपाय करना भी उनकी जिम्मेदारी है। 




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