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राज्यपाल रमेन डेका ने लोककलाओं को डिजिटल माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने पर दिया जोर

14 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राज्यपाल रमेन डेका ने लोककलाओं को डिजिटल माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने पर दिया जोर
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल व कुलाधिपति रमेन डेका ने लोककलाओं को डिजिटल माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने की जरूरत है।


राज्यपाल रमेन डेका ने पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की इन सांस्कृतिक धरोहरों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाई जानी चाहिए। डिजिटल माध्यम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया। 


संगीत और कला समाज की सांस्कृतिक पहचान 

राज्यपाल रमेन डेका ने विश्वविद्यालय की स्थापना में दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि राजपरिवार ने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। राज्यपाल ने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास, परंपराओं और संस्कृति को अभिव्यक्त करने के सशक्त माध्यम हैं। 

रोजगार के अवसर भी किए जा सकते हैं विकसित

राज्यपाल ने कहा कि कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी कलात्मक प्रतिभा को निखारने और कला को आजीविका एवं व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ इनके माध्यम से रोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।


राजपरिवार का योगदान अनुकरणीय: संतोष पांडे

कार्यक्रम में सांसद संतोष पांडे ने राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पुत्री की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिया गया दान अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जमीन दान करना भी कठिन है, लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांसद ने विद्यार्थियों को शिक्षा, कला-कौशल, परिश्रम और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।


कुलपति  डॉ. लवली शर्मा ने दिया स्वागत उद्बोधन

समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई। इस अवसर पर राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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