
रायपुर। सुकमा में जिला प्रशासन की ओर से संचालित पुनर्वास केंद्र में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। कभी जंगलों में भटकने वाले युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। कभी घातक हथियार सामने वाले हैं हाथ अब मिलजुल कर नाश्ता और भोजन बना रहे हैं। वॉलीबॉल खेल रहे हैं। पुनर्वास केंद्र में भारत माता की जय के नारे गूंज रहे हैं।
जिला पुनर्वास केंद्र में113 आत्मसमर्पित युवा (42 महिलाएं और 71 पुरुष) रह हैं। उनकी जिंदगी अब पूरी तरह से बदल चुकी है। पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी और साफ-सफाई भी कर रहे हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखाते हैं।
आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण भी
समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता से बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण भी दी जा रही है।
युवाओं को उपलब्ध कराए गए हैं 5G स्मार्टफोन
वर्तमान डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5G स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज और नई जानकारियों से सीधे जुड़ पा रहे हैं। शाम को सभी युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है।
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