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छत्तीसगढ़ को पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य: विष्णुदेव साय

10 मार्च, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
छत्तीसगढ़ को पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य: विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ को पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य: विष्णुदेव साय

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रायपुर। प्रदेश में एनर्जी इंवेस्टर्स समिट में कई बड़ी कंपनियों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का एलान किया है। सीएम विष्णुदेव साय का कहना है कि ऊर्जा के क्षेत्र में यह निवेश राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बने बल्कि पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित हो।

    

मुख्यमंत्री का कहना है छत्तीसगढ़ अब ऊर्जा क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस निवेश से राज्य में परमाणु, थर्मल, सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इससे न केवल उद्योगों को फायदा मिलेगा बल्कि आम लोगों को भी सस्ती और निरंतर बिजली मिल सकेगी। प्रदेश पहले से ही 30,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है, जो देश के औसत से ज्यादा है। अब हर व्यक्ति को 2048 किलोवाट-घंटे बिजली मिल रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं।


परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी ने 80,000 करोड़ रुपये की लागत से 4200 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इससे छत्तीसगढ़ में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी। थर्मल पावर क्षेत्र में भी बड़े निवेश की घोषणा हुई है। अदानी पॉवर 66,720 करोड़ रुपये खर्च कर कोरबा, रायगढ़ और रायपुर में 1600-1600 मेगावाट के तीन थर्मल पावर प्लांट लगाएगा। जिंदल पावर रायगढ़ में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 12,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि सरदा एनर्जी रायगढ़ में 660 मेगावाट क्षमता के प्लांट के लिए 5,300 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके अलावा, सरकारी कंपनियां एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल 41,120 करोड़ रुपये की लागत से 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।


सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ी सफलता मिली

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। जिंदल पावर और एनटीपीसी ग्रीन मिलकर 10,000 करोड़ रुपये खर्च कर 2500 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करेंगे। इसमें डोलेसरा में 500 मेगावाट और रायगढ़ में 2000 मेगावाट के सौर प्लांट शामिल होंगे। किसानों के लिए भी खुशखबरी है। पीएम कुसुम योजना के तहत 4100 करोड़ रुपये की लागत से 675 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन किया जाएगा और 20,000 सोलर पंप लगाए जाएंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलेगी और डीजल पंपों की जरूरत कम होगी।


पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे

मुख्यमंत्री का कहना है 57,046 करोड़ रुपये की लागत से 8700 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे। इसमें एसजेएन कोटपाली में 1800 मेगावाट और जिंदल रिन्यूएबल द्वारा 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी निवेशों के जरिए छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे उद्योगों, किसानों और आम लोगों को फायदा होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।


प्रमुख निवेश और योजनाएं

1. परमाणु ऊर्जा: साफ और कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए 80,000 रुपए करोड़ का निवेश।

2. ताप विद्युत: राज्य की ताप विद्युत क्षमता को मजबूत करने के लिए 1,07,840 करोड़ रुपए।

3. सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए 10,000 करोड़ रुपए।

4. पीएम कुसुम योजना: किसानों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 4,100 करोड़ रुपए।

5. पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): ग्रिड स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण में 57,046 करोड़ रुपए।

6. क्रेडा सौर पहल: सौर ऊर्जा विस्तार के लिए 3,200 रुपए करोड़।

7. पीएम सूर्य योजना: राष्ट्रीय सौर छत परियोजना के तहत 6,000 करोड़ रुपए।

8. सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए 2,500 करोड़ रुपए।

9. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए 2,600 करोड़ रुपए।

10. पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क: बिजली पारेषण नेटवर्क को उन्नत करने के लिए 17,000 करोड़ रुपए।

11. RDSS (वितरण क्षेत्र योजना): वितरण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 10,800 करोड़ रुपए।

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