
रायपुर। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज की जरूरत है, लेकिन इसका उपयोग मानव समाज के हित में संतुलित ढंग से किया जाना चाहिए। डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य लत से अधिक खतरनाक हो गया है। विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए उसके दुष्प्रभावों से बचना चाहिए।’ ये बातें, राज्यपाल रमेन डेका ने शनिवार को आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि उनके दौर में शिक्षा चाक, पेंसिल, पुस्तकों और गुरुओं के माध्यम से मिलती थी। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विकास के साथ उसके दुष्प्रभावों पर भी ध्यान देना होगा। न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रो प्लास्टिक जैसी चुनौतियों के बीच सतत विकास को प्राथमिकता देना जरूरी है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवत गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि कर्म ही जीवन है। दूसरों की सोच की चिंता किए बिना पढ़ाई, लक्ष्य और अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करें। ज्ञान ऐसी पूंजी है, जिसे कोई आपसे नहीं छीन सकता। विद्यार्थियों को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर सही रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं डिफेंस साइंटिस्ट डॉ. वी. सतीश रेड्डी और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे ने स्वागत भाषण एवं विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
नशे से दूर रहकर मानसिक-शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की अपील की
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। छत्तीसगढ़ को लौह अयस्क की समृद्धि के साथ एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास जरूरी हैं। विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने तथा नशे से दूर रहकर मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की अपील की।
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