
रायपुर। प्रदेश सरकार ने वनांचल में रहने वाले वनोपज संग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने शुक्रवार को नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से ‘छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी’ और आईवीआरएस आधारित सूचना व संवाद तंत्र का शुभारंभ किया। इससे 13 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक परिवारों को एक मिस्ड कॉल पर स्थानीय भाषाओं में बाजार और योजनाओं की जानकारी मिलेगी।
संग्राहकों को जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। संग्राहकों को टोल फ्री नंबर +91-9811125813 पर एक मिस्ड कॉल करना होगा। मिस्ड कॉल के बाद 911 से शुरू होने वाले नंबर से उपयोगकर्ता को कॉल बैक आएगा। कॉल रिसीव करते ही संग्राहक अपनी स्थानीय बोलियों जैसे हल्बी, गोंडी आदि में महत्वपूर्ण जानकारियां सुन सकेंगे। जानकारी सुनने के साथ ही उपयोगकर्ता अपनी राय, अनुभव और सुझाव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे।
स्थानीय बोलियों को प्राथमिकता के कारण वनांचल की क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलने से सूचनाओं का प्रसार अधिक प्रभावी होगा। जंगल, वनोपज संरक्षण, सतत संग्रहण, बाजार भाव और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी सीधे संग्राहकों तक पहुंचेगी। बाजार भाव और मूल्य संवर्धन की सही जानकारी मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और संग्राहकों की आय बढ़ेगी। यह केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि संग्राहकों और शासन के बीच संवाद का एक मजबूत मंच बनेगा।
वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता
मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक जानकारी पहुंचाने का यह प्रयास राज्य के लाखों परिवारों के लिए आजीविका का संबल बनेगा। वनोपज संरक्षण वाणी तकनीक और जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार व विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर की ओर से संचालित की जा रही है।
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