
रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बुधवार को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के नए कार्ड में अब आभा आईडी को शामिल कर दिया गया है, जिससे मरीज़ों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और सुलभ बनेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अटल आरोग्य लैब की रिपोर्ट अब मरीज़ के मोबाइल पर सीधे भेजी जा रही है, जिससे उन्हें तत्काल जानकारी मिले। यह सरकार की प्राथमिकता है और यह करना ही है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी से सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लक्ष्य को लेकर कार्य चल रहा है। इसके लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। हम काफ़ी हद तक इसमें सफल भी हो रहे हैं।यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है कि हम समय के अनुसार चलें और नई तकनीकों को अपनाएं। जब तक हम खुद जानकार नहीं होंगे, बेहतर मॉनिटरिंग संभव नहीं हो पाएगी। विभाग सतत रूप से इस दिशा में काम कर रहा है।अधिकारी-कर्मचारी लगातार मेहनत कर रहे हैं। कोशिश है कि सारे इलाज आभा के ज़रिए लिंक हो जाएं, इसके लिए निजी अस्पतालों से भी डाटा शेयर होना बहुत ज़रूरी है।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, एनएचए भारत सरकार के संचालक विक्रम पगारिया, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
प्रदेश में 2.63 करोड़ नागरिकों के आभा बनाए जा चुके
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की मॉडल डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव कार्यशाला में राज्य की डिजिटल हेल्थ प्रगति की विस्तृत जानकारी साझा की गई। बताया गया कि एबीडीएम का सबसे नागरिक-केंद्रित हिस्सा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) है। इसके ज़रिए नागरिक अपनी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं।अपनी सहमति से डॉक्टरों के साथ साझा कर सकते हैं। प्रदेश में 2.63 करोड़ नागरिकों के आभा बनाए जा चुके हैं।
हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर जुड़े
स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण के लिए बनी हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से राज्य में 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर जुड़ चुके हैं, जबकि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के माध्यम से अस्पताल, क्लिनिक, लैब और ब्लड बैंक जैसे 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान नेटवर्क से जुड़ गए हैं। एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस के प्रभावी उपयोग से मरीज़ों का पूरा रिकॉर्ड (पंजीयन से लेकर उपचार और डिस्चार्ज तक)डिजिटल रूप में दर्ज होगा। इससे मेडिकल रिकॉर्ड की जांच आसान होगी, क्लेम प्रोसेसिंग में लगने वाला समय घटेगा और ऑडिट वेरिफिकेशन अधिक व्यवस्थित होगा।
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