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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- आदिवासी परंपरागत व्यवस्था सामाजिक एकता और न्याय का उदाहरण

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- आदिवासी परंपरागत व्यवस्था सामाजिक एकता और न्याय का उदाहरण
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रिपोर्ट: प्रशांत द्विवेदी 

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर में ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था को सामाजिक एकता, न्याय, आपसी सहयोग और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने पीढ़ियों से अपनी परंपराओं, सामाजिक नियमों और अलिखित संविधान को जीवित रखा है, जो समाज में प्रेम, सद्भाव व सामूहिकता का आधार है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी संस्कृति से अपने गहरे जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा- “मैं भी मांझी की बेटी हूं।” उन्होंने बताया कि उनके दादाजी और पिताजी मांझी थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ शासन व्यवस्था और कानून बदलते रहे, लेकिन आदिवासी समाज ने अपनी पारंपरिक संस्थाओं और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रखा है।


कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, महापौर संजय पांडे, पारंपरिक मांझी-चालकी तथा बस्तर दशहरा समिति के सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रपति सहित अतिथियों को काष्ठ कला की कलाकृतियां स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गईं।


आपसी सहमति से विवादों का समाधान करना आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण विशेषता

राष्ट्रपति ने मांझी, पीड़ परगना और देश परगना की पारंपरिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सामूहिक विचार-विमर्श और आपसी सहमति से विवादों का समाधान करना आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार आदिवासी समाज के विकास और कल्याण के लिए सहयोग करती रहेगी।


संगठित समाज बड़ी से बड़ी चुनौती का कर सकता है सामना

राष्ट्रपति ने नक्सलवाद की चुनौती पर समाज से एकजुट रहने और अपने गांव, समाज तथा भविष्य के संबंध में स्वयं निर्णय लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठित समाज बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है। राष्ट्रपति ने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और विकास के अवसर अपनाने के साथ आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाजों तथा सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखने की अपील की।


 


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