गुरुवार, 04 जून 2026
Logo
Chhattisgarh

14 साल की बच्ची को बताया गर्भवती! अगले दिन रिपोर्ट निकली गलत, अस्पताल और पुलिस दोनों पर सवाल

04 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
14 साल की बच्ची को बताया गर्भवती! अगले दिन रिपोर्ट निकली गलत, अस्पताल और पुलिस दोनों पर सवाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रायपुर। राजनांदगांव जिले से सामने आया एक मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जांच रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती बताया गया, लेकिन अगले ही दिन जिला अस्पताल की जांच में यह दावा पूरी तरह गलत साबित हो गया। इस कथित गलती के बाद बच्ची और उसके परिवार को न केवल मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि सामाजिक दबाव और पुलिस कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा। मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, किशोरी लंबे समय से मासिक धर्म से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या से परेशान थी। उपचार के लिए परिजन उसे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां नियमित जांच के दौरान यूरिन टेस्ट कराया गया। इसी जांच के आधार पर स्वास्थ्य केंद्र की ओर से परिवार को बताया गया कि बच्ची लगभग दो माह की गर्भवती है। रिपोर्ट सामने आते ही परिवार स्तब्ध रह गया और नाबालिग पर भी भारी मानसिक दबाव बन गया। यहीं से घटनाक्रम ने नया मोड़ लेना शुरू किया।


जिला अस्पताल की जांच में निकली रिपोर्ट गलत

परिजनों को शुरुआती रिपोर्ट पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने अगले ही दिन जिला अस्पताल में दोबारा जांच कराई। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल की रिपोर्ट में गर्भावस्था की कोई पुष्टि नहीं हुई और परिणाम पूरी तरह नेगेटिव आया। इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जांच प्रक्रिया, रिपोर्टिंग सिस्टम और इस्तेमाल किए गए संसाधनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे। अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी गंभीर गलती कैसे हुई।


पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब परिवार ने पुलिस के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए। परिजनों का आरोप है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद सोमनी थाना स्टाफ ने किशोरी से पूछताछ की और उसे रात भर थाने में रखा गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इन आरोपों के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।


एसपी ने थाना प्रभारी समेत स्टाफ को किया निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए संबंधित थाना प्रभारी और जुड़े स्टाफ को निलंबित कर दिया है। हालांकि स्थानीय लोगों और परिवार का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।


प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की गुणवत्ता पर उठे सवाल

जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि जिस प्रेग्नेंसी टेस्ट किट के आधार पर शुरुआती रिपोर्ट तैयार की गई थी, उसकी खरीद स्थानीय स्तर पर की गई थी। इसके बाद किट की गुणवत्ता, उसकी प्रमाणिकता और खरीद प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों से जुड़े संवेदनशील मामलों में जांच उपकरणों की गुणवत्ता और सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण होता है।


परिवार ने उठाई कड़ी कार्रवाई की मांग

परिवार का कहना है कि एक गलत रिपोर्ट ने उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक शांति और पारिवारिक जीवन को प्रभावित किया। उन्हें रिश्तेदारों और समाज के कई सवालों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरी जांच कर यह तय किया जाए कि गलती कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें