
रायपुर। विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जीरामजी के तहत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कार्यों की संख्या बढ़ने से गांवों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
राज्य सरकार ने वीबी-जीरामजी के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए मिशन के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है।
375 कार्य चार प्रमुख श्रेणियों में
वीबी-जीरामजी के तहत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें जल संरक्षण एवं सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संबंधी अधोसंरचना तथा आपदा एवं चरम मौसम से बचाव से जुड़े कार्य शामिल हैं। ग्रामीणों को इन कार्यों की जानकारी देने के लिए क्यूआर कोड भी जारी किया गया है। जल संरक्षण के तहत तालाबों का पुनर्जीवन, चेकडैम, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, सिंचाई कुएं, वर्षाजल संचयन, वनीकरण और मृदा-नमी संरक्षण जैसे कार्य किए जा सकेंगे। ग्रामीण अधोसंरचना में सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल भवन, शौचालय, खेल मैदान, स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
6,671 बालिका शौचालयों का लक्ष्य
ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं के लिए सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 26 जनवरी 2027 तक 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड और परिसर की दीवार जैसे कार्य भी कराए जा सकेंगे।
हर गांव में मुक्तिधाम की दिशा में पहल
राज्य सरकार ने हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया है। इसके तहत 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही 10 हजार से अधिक बंद या डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं विकसित करने की योजना है। आपदा प्रबंधन के तहत बाढ़ एवं चक्रवात आश्रय, तटबंध, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, विंडब्रेक, वन अग्नि प्रबंधन और आपदा के बाद ग्रामीण परिसंपत्तियों के पुनर्स्थापन जैसे कार्य भी अनुमेय होंगे।
आजीविका और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा
मिशन में स्वयं सहायता समूहों के वर्कशेड, ग्रामीण हाट, कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, पशु आश्रय, मत्स्य पालन, नर्सरी, वर्मी कम्पोस्ट और कृषि प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना निर्माण को भी शामिल किया गया है। मिनी फ्लोर मिल, खाद्य एवं वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और बांस शिल्प जैसी गतिविधियों के लिए भी स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
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