
रायपुर। सुकमा जिले में वन विभाग की पहल विकास और पुनर्वास की मिसाल पेश कर रही है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है। तीन माह में ही करीब 9 हजार पर्यटक यहां पहुंचे हैं।
तुंगल इको-पर्यटन केंद्र सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था। वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहां बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
पर्यटन केंद्र 31 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ। 30 मार्च 2026 तक यहां 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक केंद्र पहुंचकर स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं।
महिलाएं आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का कर रही स्वागत
इस केंद्र की सबसे खास पहल “तुंगल नेचर कैफे” है। इसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएं चला रही हैं। इनमें 5 महिलाएं वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएं नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। ये महिलाएं आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।
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