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मुख्य सचिव ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश

17 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मुख्य सचिव ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के क्रियान्वयन के संबंध में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। 


बैठक में जानकारी दी गई कि इस एक्ट के शेड्यूल-1 के अंतर्गत 43 सेवाएं, 9 शासकीय अधिनियम और 8 प्रशासनिक विभाग शामिल किए गए हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए 27 अगस्त 2026 से 90 दिनों की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। एक्ट के तहत तीन-स्तरीय निगरानी और समीक्षा प्रणाली निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एपेक्स काउंसिल, कार्यकारी स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति, जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला सशक्त समिति बनाई गई है।


मुख्य सचिव ने एक्ट का प्रथम प्रारूप तैयार कर संबंधित विभागों से जल्द सुझाव प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यक संशोधन प्रस्ताव तैयार रखकर प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप देने को कहा गया है। बैठक में विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार ठाकुर, माननीय मुख्यमंत्री के सचिव एवं वाणिज्यिक कर तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश

बैठक में डीम्ड अप्रूवल प्रमाण-पत्र के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रमाण-पत्र जारी न होने के मामलों की समीक्षा करने, आवश्यक कार्रवाई करने और विलंब की स्थिति में नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने एक्ट का चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, नोडल विभागों का निर्धारण करने और आवश्यक मानक कार्यप्रणाली अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विभागवार सेवाओं की नियमित समीक्षा और त्रैमासिक मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया है।



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