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हाउसिंग बोर्ड अब सड़क, पुल और टाउनशिप विकास में भी निभाएगा बड़ी भूमिका: ओपी चौधरी

27 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
हाउसिंग बोर्ड अब सड़क, पुल और टाउनशिप विकास में भी निभाएगा बड़ी भूमिका: ओपी चौधरी
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी अहम भूमिका निभाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मंडल को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के साथ आत्मनिर्भर संस्था के रूप में विकसित किया जाएगा।


नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार मंडल की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि करीब 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त होने से मंडल को आर्थिक राहत मिली है। वहीं, रिक्त संपत्तियों की बिक्री के लिए लागू वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना से भी राजस्व बढ़ाने में मदद मिली है।


मांग के आधार पर शुरू होंगी आवासीय परियोजनाएं

मंत्री ने कहा कि भविष्य में आवासीय परियोजनाएं वास्तविक मांग और बुकिंग के आकलन के आधार पर शुरू की जाएंगी। नई व्यवस्था में शुरुआती तीन माह में 30 प्रतिशत या कुल 60 प्रतिशत बुकिंग की शर्त को निविदा प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इससे बिना पर्याप्त मांग के परियोजनाएं शुरू करने और पूंजी फंसने का जोखिम कम होगा। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता, लागत, स्थान चयन और नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि मंडल को अगले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ के बाहर भी परियोजनाएं हासिल करने का लक्ष्य लेकर काम करना चाहिए।


पीपीपी मॉडल से 94 एकड़ भूमि की बचत

मंत्री ओपी चौधरी ने अधोसंरचना विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सेरीखेड़ी की टाउन प्लानिंग परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 800 करोड़ रुपये की अधोसंरचना लागत वाली परियोजना में पीपीपी मॉडल के जरिए विकास लागत के समायोजन के लिए जरूरी भूमि का प्रारंभिक अनुमान 218 एकड़ था, जो प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के बाद घटकर करीब 124 एकड़ रह गया। इससे लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत संभव हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल सरकारी बजट पर दबाव कम करने के साथ व्यवस्थित शहरी विकास और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में मददगार होंगे। शासकीय भूमि के पुनर्विकास से आधुनिक कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान और खेल परिसर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।


हाउसिंग बोर्ड ने 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया

मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 हजार संपत्तियों की बिक्री से मंडल ने 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है और आगामी दिसंबर में भी नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का विस्तार केवल नाम या अधिनियम में बदलाव नहीं, बल्कि सोच और कार्यसंस्कृति बदलने का अवसर है। मंडल का लक्ष्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित टाउनशिप विकसित करना है। इसके लिए आवासीय कॉलोनियों में उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।


एआई और आधुनिक तकनीक पर प्रशिक्षण

कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग, आधुनिक निर्माण तकनीक, परियोजना विपणन और सुशासन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर के विशेषज्ञों ने भी विभिन्न तकनीकी सत्रों में मार्गदर्शन दिया। मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि अधोसंरचना में निवेश से रोजगार, व्यापार, परिवहन और पर्यटन को गति मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और निजी निवेश के प्रभावी उपयोग से हाउसिंग बोर्ड विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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