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Chhattisgarh

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास में बिखरी हरेली तिहार की अनुपम छटा

24 जुल, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Hareli tihar utsav

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Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास में गुरुवार को हरेली तिहार की अनुपम छटा बिखरी। पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच मनोहारी नृत्य प्रस्तुतियां दी गई। पूरा परिसर उत्सव के वातावरण से सराबोर हो गया। 

मुख्यमंत्री निवास परिसर में ग्रामीण परिवेश की सुंदर और जीवंत झांकी सजी हुई थी। परंपरागत वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत देखते बन रही थी। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य हवा में घुल रहा था। राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।

 

राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है। राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे- ढोल, मांदर और नगाड़ा का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं।

 

यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।

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