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बालश्रम की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में चलाए जाएं व्यापक छापेमारी अभियान: डॉ. वर्णिका शर्मा

22 अप्रैल, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
बालश्रम की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में चलाए जाएं व्यापक छापेमारी अभियान: डॉ. वर्णिका शर्मा

बालश्रम की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में चलाए जाएं व्यापक छापेमारी अभियान: डॉ. वर्णिका शर्मा

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालश्रम के प्रति कड़ा रुख दिखाया है। कार्यभार ग्रहण के दूसरे ही दिन उन्होंने बालश्रम की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में व्यापक छापेमारी अभियान चलाए जाने के निर्देश जारी किए हैं।

       

डॉ. वर्णिका शर्मा ने सभी जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को आठ बिंदुओं पर आधारित सुनियोजित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि बालश्रम का उन्मूलन एक दिवस की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत अभियान है, जिसे निरंतरता से संचालित किया जाना चाहिए। डॉ. शर्मा ने अप्रैल से शुरू करके प्रत्येक तीन माह में सात दिवसीय प्रदेशव्यापी छापामारी अभियान चलाए जाने के निर्देश दिए हैं। इस कड़ी में जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस प्रशासन और संबंधित थाना क्षेत्रों की भागीदारी से विशेष दलों का गठन किया जाएगा। अभियान के दौरान पाए गए बाल श्रमिकों को तत्काल आवश्यकतानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।


टोल फ्री नंबर की स्थापना और उसके सक्रिय संचालन की अनुशंसा की

आम नागरिकों की सहभागिता को बढ़ाने के लिए डॉ. वर्णिका शर्मा ने श्रम विभाग के अंतर्गत टोल फ्री नंबर की स्थापना और उसके सक्रिय संचालन की अनुशंसा की है। जिससे बाल श्रम संबंधी सूचनाएं त्वरित रूप से प्राप्त की जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यवाहियों के दौरान राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाए। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम प्रतिषेध दिवस (12 जून 2025) को सार्थक बनाते हुए, प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर के समक्ष श्रम विभाग की ओर से बाल श्रम की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।


परिवारों को तत्काल उपलब्ध कराया जाए रोजगार

बाल श्रम के मूल कारणों को ध्यान में रखते हुए, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने यह भी निर्देशित किया है कि बचाए गए बालकों के परिवारों को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए जिला कलेक्टोरेट स्तर पर ‘एकल खिड़की व्यवस्था’ स्थापित करने की सिफारिश की गई है, जिससे प्रभावित परिवारों को समुचित और त्वरित सहायता दी जा सके।

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