
रायपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के शिक्षकों को संबोधित पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अभाव और कठिनाइयाँ किसी बच्चे की पढ़ाई और उसके सपनों की राह में बाधा न बनें। बच्चे का जन्म छोटे गांव, वनांचल या दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है, इसलिए वह अवसरों से वंचित न रहे। वह ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहां किसी बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय न करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाया जा रहा है। मातृभाषा व स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी उन स्कूलों की घंटियां फिर सुनाई दे रही हैं, जो परिस्थितियों के कारण वर्षों से बंद थे। यह बदलाव केवल भवन और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हर बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देना है। सरकार ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहती है, जहां किसी बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय न करें।
शिक्षक पहचानें बच्चों की प्रतिभा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकल्प को जमीन पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। कक्षा में बैठा हर बच्चा अनगिनत संभावनाएं लेकर आता है। वह वैज्ञानिक, खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक बन सकता है। कई बार बच्चे स्वयं अपनी क्षमता नहीं पहचान पाते, लेकिन शिक्षक की पारखी नजर उनकी प्रतिभा को पहचान सकती है। उन्होंने शिक्षकों से विशेष आग्रह किया कि वे अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामें। शिक्षक का विश्वास और प्रोत्साहन किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और क्षमताओं का विकास भी है।
हर स्कूल बने सपनों का द्वार
मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस पर अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि गांव के एक छोटे स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी के रूप में भी अपने शिक्षकों को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ स्कूल, शिक्षण पद्धतियां और तकनीक बदल रही हैं, लेकिन गुरु-शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का संबंध हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाएं, जहां हर स्कूल सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार और हर शिक्षक आशा का दीप बने। उन्होंने प्रदेश के सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

