
रायपुर। राजधानी में चल रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान पूनम ऑरन ने अपने जज्बे का लोहा मनवाया। कंधे के दर्द और प्रतिद्वंदियों दोनों को मात देकर पूनम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
एक तो चोटिल कंधे के साथ मैट पर उतरना अपने आप में बड़ा जोखिम था, दूसरे फाइनल में भी पूनम बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के साथ दर्द साफ नजर आ रहा था, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अंत तक लड़ते हुए मुकाबला अपने पक्ष में किया। पूनम ने महिलाओं की 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में तेलंगाना की के. गीता को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
जब नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती
अपने करियर का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद पूनम ने मीडिया से कहा कि जब वह नौ साल से हार नहीं मानी, तो अब कैसे मान लेती। उनकी यह चोट बहुत पुरानी है। छह साल पहले उनका कंधा उतर गया था। बीच में ठीक हुआ, पर ट्रेनिंग के दौरान दोबारा चोट लग गई। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और गोल्ड जीता है। उन्होंने कहा कि नौ साल तक गोल्ड न जीत पाने के दर्द के मुकाबले यह चोट कुछ भी नहीं है।'
पूनम के लिए यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी
झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम के लिए यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। साल 2017 में जब उन्होंने कुश्ती की शुरुआत की थी, उसी दौरान एक गंभीर चोट ने उन्हें करीब एक साल तक मैट से दूर कर दिया। वापसी के बाद उन्होंने 2018 और 2019 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया में कांस्य पदक जीते, लेकिन इसके बाद पदक जीतने का इंतजार लंबा चला।
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