मंगलवार, 17 मार्च 2026
Logo
Dharma
जानें 'स्वाहा' शब्द का अर्थ, हवन करते वक्त क्यों बोला जाता है इसे
अभी-अभी 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
जानें 'स्वाहा' शब्द का अर्थ, हवन करते वक्त क्यों बोला जाता है इसे

जानें 'स्वाहा' शब्द का अर्थ, हवन करते वक्त क्यों बोला जाता है इसे

N
डेस्क रिपोर्टर

हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य से पहले पूजा-पाठ और हवन-अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान को याद करना और उनकी विधि विधान से पूजा-पाठ करने से काम में सफलता मिलती है। पूजा को पूरा करने के लिए हवन किया जाता है। आपने गौर किया होगा कि जब भी हम हवन में आहुति देते है तो इस वक्त स्वाहा कहते है। इसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आखिर क्यों हवन में आहुति देते वक्त स्वाहा कहा जाता है। आज हम आपको स्वाहा कहने की वजह और उससे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते है।


क्या है स्वाहा शब्द का अर्थ

प्राचीन काल से ही यज्ञ की वेदी में आहुति देते वक्त स्वाहा शब्द बोला जा रहा है। इस शब्द का अर्थ सही रीति से पहुंचाना होता है। जब भी कोई हवन करता है तो यज्ञ की वेदी में स्वाहा का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री हवन कुंड में अर्पित करता है। तो यही हवन सामग्री का भोग अग्नि के जरिए देवताओं तक जाता है। मान्यता के मुताबिक, कोई भी हवन या यज्ञ तब तक पूरा नहीं माना जाता है जब तक हविष्य का ग्रहण देवी देवता नहीं कर लेते है और देवता तभी यह हविष्य ग्रहण करते हैं जब अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से इसे अर्पित किया जाता है।


पौराणिक कथा के अनुसार स्वाहा शब्द का अर्थ

पौराणिक कथा के मुताबिक, अग्नि देव की पत्नी 'स्वाहा' हैं। ऐसे में हवन के वक्त स्वाहा शब्द का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री अग्नि देव के जरिए देवी देवताओं तक पहुंचाई जाती है। पुराणों में उल्लेख किया गया है कि ऋग्वेद काल में देवता और मनुष्य के बीच अग्नि को माध्यम के रूप में माना गया था। मान्यता के अनुसार,अग्नि में जो भी सामग्री जाती है वो पूरी तरह से पवित्र हो जाती है। अग्नि के माध्यम से अग्नि में दी गई सभी सामग्री देवी देवताओं तक पहुंच जाती है। श्रीमद्भागवत गीता और शिव पुराण में इससे जुड़ी कई कथाओं के बारे में बताया गया है।  





पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें