
आज से पूरे देश में भक्ति का सबसे बड़ा पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुका है। मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आई हैं। मान्यता है कि जब देवी हाथी पर आती हैं तो यह समृद्धि, उन्नति और खुशहाली का संकेत होता है। मां के आगमन के साथ ही घर-घर में कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है। भक्तों में अद्भुत उत्साह है और सोशल मीडिया से लेकर मंदिरों तक हर जगह “जय माता दी” के जयकारे गूंज रहे हैं।
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत
आज 22 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी और 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा। ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय (महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ‘ट्रस्ट’, लखनऊ) के अनुसार, “शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है और इस बार मां का आगमन हाथी पर हुआ है, जो बेहद शुभ माना जाता है।”
कलश स्थापना और विशेष अभिजीत मुहूर्त
➡️ कलश स्थापना का सामान्य मुहूर्त: सुबह 06:00 बजे से शाम तक
➡️ विशेष अभिजीत मुहूर्त: 11:36 बजे से 12:24 बजे तक
ज्योतिषाचार्य पाण्डेय का कहना है कि इस समय किया गया कलश स्थापना का संकल्प विशेष फलदायी होगा।
नवरात्रि पहले दिन के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:22 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:36 से 12:24 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:50 से 12:38 बजे तक (मंत्र सिद्धि के लिए श्रेष्ठ)
शुभ चौघड़िया मुहूर्त (दिन)
अमृत (सर्वोत्तम): 06:09 से 07:40 बजे तक
शुभ (उत्तम): 09:11 से 10:43 बजे तक
चर (सामान्य): 01:45 से 03:16 बजे तक
लाभ (उन्नति): 03:16 से 04:47 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): 04:47 से 06:18 बजे तक
नवरात्रि पहली रात के चौघड़िया मुहूर्त
चर (सामान्य): 06:18 से 07:47 बजे तक
लाभ (उन्नति): 10:45 से 12:14 बजे तक
शुभ (उत्तम): 01:43 AM से 03:12 AM (23 सितंबर)
अमृत (सर्वोत्तम): 03:12 AM से 04:41 AM (23 सितंबर)
चर (सामान्य): 04:41 AM से 06:10 AM (23 सितंबर)
आज का विशेष मंत्र जाप
पूजन के समय मां भगवती का ध्यान करते हुए यह मंत्र जपें:
“जयंती मंगला काली भद्र काली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥”
मान्यता है कि इस मंत्र के जप से साधक को समस्त कष्टों से मुक्ति और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री का पूजन जीवन में स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
नवरात्रि का ज्योतिषीय महत्व
पं. राकेश पाण्डेय बताते हैं कि इस बार नवरात्रि शुक्ल योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रारंभ हुई है, जो विशेष शुभ है। ऐसे योग में मां दुर्गा की साधना शीघ्र फलदायी होती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
नवरात्रि 2025 में क्या खास?
➡️ मां का आगमन हाथी पर — समृद्धि और सुख का संकेत
➡️ पूरे देशभर में मंदिरों में विशेष सजावट और पूजन की तैयारी
➡️ सोशल मीडिया पर भक्तों के लिए लाइव दर्शन और पूजा प्रसारण
➡️ आध्यात्मिक आयोजन और सामूहिक दुर्गा सप्तशती पाठ
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

