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असंतुलन से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने का समय है नवरात्रि: अश्विनी गुरुजी ध्यान आश्रम
29 मार्च, 2025 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
असंतुलन से सामान्य स्थिति  की ओर बढ़ने का समय है नवरात्रि: अश्विनी गुरुजी ध्यान आश्रम

असंतुलन से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने का समय है नवरात्रि: अश्विनी गुरुजी ध्यान आश्रम

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

देवी मां के दस ‘शक्ति रूप’ - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रकान्ता, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री और अपराजिता हैं, जो कि नौ रातों और दस दिनों में समाए हुए हैं। नवरात्रों में, प्रत्येक रात की एक विशेष शक्ति है और उस शक्ति का एक विशेष उद्देश्य। इस अवधि में मौसम परिवर्तन होता है। सृष्टि की विभिन्न शक्तियां एक असंतुलन से संतुलन की ओर बढ़ती हैं।

   

हम इस सृष्टि के पूर्ण अंश हैं, तो इस समय में हमारी प्राण शक्ति भी सृष्टि की अन्य शक्तियों की तरह एक संतुलन, एक पुनः निर्माण की प्रक्रिया से होकर गुजरती है। इस समय शरीर को अल्प और सुपाच्य आहार के माध्यम से हल्का रखा जाता है। सम्पूर्ण विषहरण के लिए, उपवास के अलावा कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी किया जाता है।


उपवास भी स्वयं को तपाने का एक माध्यम है

अष्टांग योग के पांच नियमों में से एक नियम है ‘तप।’ इसका अर्थ है अपने शरीर को किसी भी रूप में कष्ट देकर तपाना। तप, एक शुद्धिकरण की प्रक्रिया है, जो कि नकारात्मक कर्मों को निष्फल करने में और आत्मिक उत्थान में सहायक होती है। उपवास भी स्वयं को तपाने का एक माध्यम है। यही कारण है कि शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए, नवरात्रों में उपवास किए जाते हैं। 


वजन घटाने के उद्देश्य से न रखें उपवास

नौ दिनों तक शरीर को पुनः संगठित किया जाता है और दसवें दिन एक नयी ऊर्जा, एक नयी शक्ति को ग्रहण किया जाता है। साधक की क्षमता व आवश्यकता अनुसार ही’ गुरु’ उसके लिए उपवास व मंत्र साधना निर्धारित करते हैं। बिना किसी निरीक्षण या वजन घटाने के उद्देश्य से किए गए उपवास का शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह शरीर में असंतुलन पैदा करता है। इसलिए वजन घटाने के उद्देश्य से उपवास न रखें।


वैराग्य भाव अति आवश्यक है

किसी भी उपवास या साधना का परिणाम तभी फलित होता है जब वह वैराग्य भाव से किया जाता है। इसलिए किसी भी उपवास या साधना से पूर्व वैराग्य भाव अति आवश्यक है, जो कि अष्टांग योग और सनातन क्रिया के अभ्यास के माध्यम सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।    


अश्विनी गुरुजी ध्यान आश्रम के मार्गदर्शक हैं। इनसे

www.dhyanfoundation.com पर जाकर संपर्क कर सकते हैं।

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