
करीब 40 दिन तक चले संघर्ष के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान ने राहत की सांस ली है। दोनों देशों के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव फिलहाल थमता दिख रहा है…
कैसे बनी सीजफायर की डील
डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के आर्मी नेतृत्व की अपील के बाद लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि आखिरी समय में चीन के दखल ने इसे अंतिम रूप देने में अहम योगदान दिया।
सीजफायर से पहले ट्रम्प की सख्त चेतावनी
समझौते से ठीक पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सुरक्षित नहीं हुई, तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी भी दी थी, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे।
क्या है सीजफायर का पूरा प्लान
इस समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे, वहीं ईरान भी सैन्य कार्रवाई बंद करेगा। सबसे अहम शर्त यह है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की निगरानी में होगी…
10 अप्रैल से होगी अहम बातचीत
सीजफायर के बाद अगला बड़ा कदम कूटनीतिक बातचीत है। 10 अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी। यह बातचीत इस्लामाबाद में होगी, जहां दोनों देश आगे की रणनीति और स्थायी समाधान पर चर्चा करेंगे…
ईरान का 10 पॉइंट प्लान, खुद को बताया विजेता
ईरान ने अमेरिका को 10 पॉइंट का प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कई सख्त शर्तें शामिल हैं। ईरानी सुरक्षा परिषद का दावा है कि यह समझौता उसकी शर्तों पर हुआ है। ईरान ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए कहा कि आगे की बातचीत भी इसी आधार पर होगी…
10 पॉइंट प्लान में क्या-क्या मांगें
- ईरान ने जिन प्रमुख मांगों को रखा, उनमें शामिल हैं:
- सभी सैन्य हमलों को पूरी तरह बंद किया जाए
- अमेरिका सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए
- फ्रीज किए गए फंड और संपत्तियां लौटाई जाएं
- युद्ध का स्थायी अंत सुनिश्चित हो
- मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना हटे
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई हो
- होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहे
- जहाजों की आवाजाही ईरान की निगरानी में हो
- हर जहाज से करीब 20 लाख डॉलर फीस वसूली जाए
- लेबनान सहित क्षेत्रीय संघर्ष खत्म किए जाएं
इन शर्तों से साफ है कि ईरान इस समझौते को सिर्फ अस्थायी नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान में बदलना चाहता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल 2 हफ्ते का सीजफायर मिडिल ईस्ट में राहत लेकर आया है, लेकिन असली परीक्षा अब बातचीत में होगी। क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समझौते में बदलेगी, या फिर तनाव दोबारा बढ़ेगा—इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।
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