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21 अप्रैल से पहले अमेरिका-ईरान डील के करीब, तेल नाकेबंदी और बैकचैनल बातचीत ने बढ़ाया दबाव

16 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
21 अप्रैल से पहले अमेरिका-ईरान डील के करीब, तेल नाकेबंदी और बैकचैनल बातचीत ने बढ़ाया दबाव
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

21 अप्रैल की डेडलाइन नजदीक है और इसी के साथ अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद भी तेज हो गई है। हालात ऐसे हैं कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है। आगे क्या होगा—यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।


सीजफायर खत्म होने से पहले तेज हुई बातचीत

सीजफायर की 21 अप्रैल की समयसीमा से पहले दोनों देशों के बीच बातचीत में तेजी आई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बनती दिख रही है, हालांकि कुछ अहम मतभेद अभी भी अटके हुए हैं। यह संकेत देता है कि डील करीब है, लेकिन आखिरी मोड़ पर अड़चनें भी कम नहीं हैं।


तेहरान में अहम बैठक

इस बीच तेहरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir और ईरानी अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। मुनीर पहले ही विदेश मंत्री Abbas Araghchi से मुलाकात कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि वह अमेरिका का संदेश लेकर पहुंचे हैं। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस पूरे घटनाक्रम में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं—जिससे बातचीत को नया रास्ता मिल सकता है।


अमेरिकी टीम सक्रिय, ड्राफ्ट प्रस्तावों पर काम

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner मिलकर बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच ड्राफ्ट प्रस्ताव साझा किए जा रहे हैं। हालांकि सीजफायर बढ़ाने पर अभी औपचारिक सहमति नहीं बनी है—जो इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम बिंदु बन सकता है।


होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी से बढ़ा दबाव

Strait of Hormuz में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान पर जबरदस्त दबाव बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM के अनुसार, पिछले 48 घंटों में कोई जहाज ईरानी बंदरगाह तक नहीं पहुंच पाया और 9 जहाजों को वापस लौटना पड़ा। यह आर्थिक दबाव बातचीत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है।


तेल निर्यात पर असर, अर्थव्यवस्था पर खतरा

ईरान रोजाना करीब 15 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिससे उसे लगभग 140 मिलियन डॉलर की कमाई होती है। लेकिन नाकेबंदी के चलते खासकर Kharg Island से होने वाला करीब 90% निर्यात प्रभावित हो सकता है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो ईरान को उत्पादन रोकना पड़ सकता है—जो उसकी पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।


परमाणु कार्यक्रम पर भी बढ़ी बातचीत

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत में प्रगति हुई है। हालिया कूटनीतिक प्रयासों और हमलों के बाद ईरान की परमाणु क्षमता प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इसी वजह से अब दोनों पक्ष समझौते के करीब दिख रहे हैं। हालांकि विरोध और मतभेद अभी भी मौजूद हैं—जो आखिरी फैसले को टाल सकते हैं।

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