
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद देश में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरुओं और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि इस घटना का बदला लेना देश की प्राथमिकता रहेगा। शुक्रवार को दिए गए अलग-अलग बयानों में धार्मिक नेताओं ने इसे "कानूनी और धार्मिक अधिकार" बताया, जबकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इस हत्या से ईरान समर्थित प्रतिरोधी समूहों का मनोबल कमजोर नहीं होगा।
अंतिम यात्रा ने दुनिया को दिया संदेश
ईरान के शहर क़ोम के शुक्रवार नमाज के इमाम अलीरेजा अराफी ने कहा कि देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता की विशाल अंतिम यात्रा ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि ईरानी जनता उनके खून का बदला लेने को अपना कानूनी और धार्मिक अधिकार मानती है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह समझ रहे हैं कि मध्य पूर्व में ईरान समर्थित प्रतिरोधी संगठनों का नेटवर्क समाप्त हो गया है, वे गलत हैं। उनके अनुसार, "प्रतिरोध का मोर्चा आज भी जीवित है और आने वाले समय में क्षेत्र के विभिन्न देशों में इसका नया स्वरूप दिखाई देगा।"
अब हर शुक्रवार की नमाज में उठेगी बदले की मांग
शहर-ए-कोर्द के शुक्रवार नमाज के इमाम अबोलहसन फातेमी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब देशभर की शुक्रवार की नमाज में दिवंगत नेता की हत्या का बदला लेने की अपील की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब से प्रत्येक शुक्रवार की नमाज के दौरान प्रतिशोध और खून का बदला लेने का आह्वान किया जाएगा। फातेमी ने यह भी कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान की नीतियों में अत्याचारियों से बदला लेना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहना चाहिए।
IRGC का संदेश- हत्या से नहीं टूटेगा प्रतिरोध
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वहीदी ने भी कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नेता की हत्या से अमेरिका और ईरान के अन्य विरोधी यह न समझें कि वे प्रतिरोध आंदोलन को कमजोर कर सकते हैं। वहीदी ने कहा कि इस हत्या से न तो ईरानी जनता का संकल्प टूटेगा और न ही प्रतिरोध का झंडा झुकेगा। उनके मुताबिक, दिवंगत नेता का खून इस्लामी दुनिया के लिए जागरूकता, सम्मान, शक्ति और एकता का नया स्रोत बनेगा।
दोषियों को सजा दिलाने की दोहराई मांग
IRGC प्रमुख ने कहा कि इस हत्या के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की मांग हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने इसे ईरान और इस्लामी राष्ट्रों की "वैध, न्यायसंगत और कभी न भूलने वाली मांग" बताया। ईरान में लगातार सामने आ रहे इन बयानों से साफ है कि देश की राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य नेतृत्व की ओर से प्रतिशोध की मांग को लगातार प्रमुखता दी जा रही है, जिससे मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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