
होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार को कुवैत के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर MT Kazimah III को मिसाइल/प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। जहाज पर मौजूद पांचों भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालकर तट पर पहुंचा दिया गया। भारतीय दूतावास ने शनिवार को इसकी जानकारी दी और बचाव अभियान में सहयोग के लिए ओमान के अधिकारियों का आभार जताया।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर भारत लगातार निगरानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार क्षेत्र में 4500 से अधिक भारतीय नाविक अलग-अलग व्यावसायिक जहाजों पर काम कर रहे हैं।
MT Kazimah III पर हमला, पांच भारतीय नाविक बचाए गए
MT Kazimah III कुवैत के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह कच्चा तेल लेकर अफ्रीका की ओर जा रहा था। ताजा रिपोर्टों में इसके गंतव्य के तौर पर टोगो के लोमे बंदरगाह का उल्लेख है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाज को एक प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया। हमले के बाद भारतीय दूतावास, मस्कट ने बचाव अभियान का समन्वय किया और पांचों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित तट पर पहुंचाया गया। हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भारत के लिए चिंता क्यों बढ़ी?
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक फरवरी से होर्मुज क्षेत्र में हुए हमलों से 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं, जबकि 11 भारतीय नाविकों की मौत हुई है।
इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
खाड़ी में 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को बताया था कि क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें भारत और दूसरे देशों के झंडे वाले जहाज शामिल हैं।
फारस की खाड़ी में भारत से संबंधित मौजूदा जहाजों की स्थिति:
- 6 भारत के झंडे वाले कमर्शियल जहाज
- 6 विदेशी झंडे वाले जहाज, जो भारत के लिए माल ले जा रहे हैं
- कुल 12 जहाज
- इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के अनुसार शिपिंग मंत्रालय जहाजों की आवाजाही पर नजर रखता है। भारतीय दूतावास और स्थानीय एजेंसियां भी नाविकों की सुरक्षा तथा उनकी स्थिति पर लगातार जानकारी लेती हैं।
जरूरत पड़ने पर भारतीय मिशन नाविकों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कदम उठाते हैं। सरकार ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया है।
संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर ने उठाया था मुद्दा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा था कि समुद्र में पैदा हो रहे नए खतरे जमीन पर चल रहे संकटों को और गंभीर बना रहे हैं। उनके मुताबिक भारतीयों के साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है और इस तरह की घटनाएं स्वीकार्य नहीं हैं।
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की थी। उनका कहना था कि समुद्री मार्गों पर काम कर रहे क्रू की सुरक्षा जरूरी है, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार दोनों इन मार्गों से जुड़े हैं।
ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया
इसी घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव भी बना हुआ है।
दिए गए इनपुट के अनुसार ट्रंप ने ईरान की ओर से युद्ध समाप्त करने और होर्मुज खोलने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि ईरान समझौता करना चाहता है क्योंकि उसे भारी नुकसान हो रहा है और उसकी आमदनी प्रभावित हुई है।
ट्रंप ने होर्मुज से होने वाले कारोबार को ईरान की कमाई से जोड़ा और कहा कि अमेरिका ने इस समुद्री मार्ग पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी की है, जिसे उन्होंने लोहे की दीवार जैसा बताया।
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