
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब समुद्री रास्तों पर भी नया संकट खड़ा हो गया है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग—होर्मुज स्ट्रेट—में जहाजों की आवाजाही अब आसान नहीं रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां से सुरक्षित गुजरने के लिए जहाजों को भारी रकम चुकानी पड़ रही है।
क्या है पूरा मामला?
एक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक तरह का “अनुमति सिस्टम” लागू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि:
- बिना मंजूरी जहाजों को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं
- सुरक्षित रास्ते के लिए शुल्क लिया जा रहा है
- एक निजी तेल टैंकर कंपनी से करीब 20 लाख डॉलर वसूले गए
हालांकि संबंधित जहाज की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
‘सुरक्षित कॉरिडोर’ क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपने नियंत्रण वाले समुद्री इलाके में एक विशेष मार्ग तैयार किया है, जहां केवल रजिस्ट्रेशन कराने वाले जहाज ही जा सकते हैं। इस प्रक्रिया की निगरानी ईरान की सैन्य इकाई कर रही है। इस “सेफ पैसेज” के लिए जहाजों को पहले अनुमति लेनी होती है, फिर उन्हें रास्ता दिया जाता है।
किन देशों पर असर?
इस स्थिति ने कई देशों को सीधे प्रभावित किया है।
प्रभावित देश:
भारत
पाकिस्तान
इराक
मलेशिया
चीन
ये सभी देश अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर ईरान से बातचीत कर रहे हैं।
भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत के लिए यह मामला बेहद अहम है क्योंकि करीब 22 भारतीय जहाज इस इलाके में फंसे बताए जा रहे हैं। तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है। एक भारतीय गैस टैंकर को पहचान जांच के लिए ईरानी जलक्षेत्र से गुजरना पड़ा। अब तक कुल मिलाकर 9 जहाज इस “सुरक्षित कॉरिडोर” का इस्तेमाल कर चुके हैं।
युद्ध का नया मोर्चा: फाइटर जेट पर दावा
तनाव सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं है। ईरान की सैन्य इकाई ने कहा है कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया। हमले का वीडियो भी जारी किया गया
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका ने हमले की पुष्टि नहीं की, लेकिन यह जरूर माना कि एक F-35 को मिशन के दौरान इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद रणनीतिक है दुनिया का लगभग 20% तेल यहीं से गुजरता है। भारत के लिए यह ऊर्जा सप्लाई का बड़ा रास्ता है। यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
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