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भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण के करीब, मार्को रुबियो ने रूसी तेल प्रतिबंधों पर भी अमेरिका का रुख किया स्पष्ट

19 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण के करीब, मार्को रुबियो ने रूसी तेल प्रतिबंधों पर भी अमेरिका का रुख किया स्पष्ट
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की बातचीत निर्णायक चरण के करीब पहुंच गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह जानकारी देते हुए वैश्विक ऊर्जा बाजार और सहयोगी देशों की आर्थिक जरूरतों को भी अमेरिकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बताया।


रुबियो ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों में दी गई छूट का बचाव किया और कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद अमेरिका को अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय संबंधों तथा आर्थिक हितों का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया।


भारत के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण के करीब

मार्को रुबियो के अनुसार, अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश इस समझौते को पूरा करने के काफी करीब हैं।


रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते और व्यापक द्विपक्षीय संबंध उन पहलुओं में शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका अपने नीतिगत फैसलों में ध्यान में रखता है।


रूसी तेल पर छूट देने के पीछे क्या है अमेरिकी तर्क?

रूस से तेल और गैस के आयात को लेकर अमेरिकी रुख पर सवाल उठने के बाद रुबियो ने प्रतिबंधों में दी गई छूट का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए अमेरिका को प्रतिबंधों में राहत देनी पड़ी।


उन्होंने अमेरिका में डीजल की ऊंची कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के कई अन्य हिस्सों में ऊर्जा संबंधी हालात इससे भी अधिक गंभीर हैं।


रुबियो के मुताबिक, जब अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर प्रतिबंधों में छूट देने का फैसला करते हैं, तो भारत के साथ व्यापार समझौते और दोनों देशों के व्यापक संबंधों जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाता है।


ऊर्जा संकट में देशों की भौगोलिक स्थिति भी अहम

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं। भौगोलिक स्थिति एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे बदला नहीं जा सकता और जिसका असर ऊर्जा आपूर्ति के विकल्पों पर पड़ता है।


उनके अनुसार, कई देशों के लिए कम समय में ऊर्जा के दूसरे स्रोतों की व्यवस्था करना आसान नहीं है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि यह परिस्थितियों का बहाना नहीं, बल्कि विदेश नीति तैयार करते समय ध्यान देने योग्य व्यावहारिक चुनौती है।


उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन पूरी विदेश नीति को सिर्फ इसी संघर्ष के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। उनके अनुसार, किसी एक मुद्दे के कारण सहयोगी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर नुकसान के जोखिम में नहीं डाला जा सकता।


रुबियो बोले- यूक्रेन युद्ध में किसी को जीत नहीं मिल रही

यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि इस युद्ध में किसी भी पक्ष को जीत हासिल नहीं हो रही है। उन्होंने लगातार हो रही मौतों और बुनियादी ढांचे व संपत्ति को पहुंच रहे नुकसान की ओर ध्यान दिलाया।


अमेरिकी विदेश मंत्री ने युद्ध समाप्त करने के लिए जल्द से जल्द समाधान तलाशने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि इसके लिए राजनयिक बातचीत के रास्ते खुले रखने और शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।


पुतिन की शांति वार्ता की इच्छा पर सवाल का जवाब

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वास्तव में शांति वार्ता के लिए तैयार हैं या नहीं, इस पर एक पत्रकार ने रुबियो से प्रमाण मांगा। जवाब में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को आपराधिक मुकदमे की तरह नहीं देखा जा सकता, जिसमें किसी दावे के समर्थन में अदालत के सामने सबूत पेश करने की प्रक्रिया लागू होती है।


रुबियो ने कूटनीति के मूल सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि शांति स्थापित करने की कोशिशें लगातार चलती रहनी चाहिए। उनके अनुसार, बातचीत के प्रयासों में रुकावट डालने के बजाय उन्हें जारी रखना जरूरी है।

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