
सीजफायर का ऐलान हुआ, लेकिन जमीन पर हालात अब भी शांत नहीं हैं। हमले रुकने के बजाय छिटपुट जारी हैं और इसी बीच अमेरिका ने फिर सख्त रुख दिखाया है।
सीजफायर के बाद भी जारी हमले, बढ़ी चिंता
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच घोषित सीजफायर के बावजूद कई इलाकों में हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इससे साफ है कि समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। हालांकि पहले 24 घंटे में किसी नई मौत की पुष्टि नहीं हुई, जो राहत की बात है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है—और यही आगे की कहानी तय करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर टकराव, दुनिया की नजरें टिकीं
सीजफायर के बाद ईरान ने कुछ समय के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोला, लेकिन फिर अचानक इसे बंद कर दिया। यह कदम वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। अमेरिका ने साफ कहा है कि यह समुद्री रास्ता हर हाल में खुला रहना चाहिए। इसी वजह से अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी वहां बढ़ा दी गई है—अब सवाल है कि आगे क्या होगा?
ट्रंप की सख्त चेतावनी—“नियम नहीं माने तो हमला तय”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा है कि अगर सीजफायर का पालन नहीं हुआ, तो पहले से भी ज्यादा बड़ा सैन्य हमला किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सैनिक पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें कार्रवाई में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यानी हालात फिर से भड़क सकते हैं—और यही डर सबसे बड़ा है।
परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का कड़ा रुख
ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान बताता है कि मामला सिर्फ सीजफायर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीतिक लड़ाई चल रही है—जो आने वाले दिनों में और खुल सकती है।
पाकिस्तान में होगी अहम बैठक, क्या निकलेगा हल?
अब सबकी नजर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर है। यहां ईरान और अमेरिका के बीच 10-पॉइंट शांति प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। यह बातचीत तय करेगी कि तनाव खत्म होगा या फिर टकराव और बढ़ेगा—यही सबसे बड़ा सवाल है।
फिलहाल राहत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
सीजफायर के शुरुआती 24 घंटों में मौतें न होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या पाकिस्तान में होने वाली बातचीत स्थायी शांति ला पाएगी या यह संघर्ष फिर से भड़क उठेगा।
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