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मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान में धमाकों से हलचल, क्या होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की रणनीति बना रहा अमेरिका?

03 नव, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान में धमाकों से हलचल, क्या होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे की रणनीति बना रहा अमेरिका?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

ईरान के सबसे बड़े द्वीप केश्म पर सोमवार को हुए सिलसिलेवार धमाकों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। यहां कम से कम 5 जोरदार विस्फोट हुए, जबकि पास के बंदर लेंगेह शहर से भी धमाके की खबर सामने आई है।


अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान होना है। उससे ठीक पहले हुई इस घटना को लेकर अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि हमले के पीछे अमेरिका का हाथ है। ईरान ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।


केश्म द्वीप पर धमाकों के बाद अमेरिकी कार्रवाई की चर्चा

विस्फोटों को लेकर ईरान और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। ईरानी मीडिया ने हमले के लिए अमेरिका या इजराइल को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। ईरानी मीडिया का दावा है कि देश ने अमेरिका के दो MQM-170 जासूसी ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, इस दावे और धमाकों के बीच संबंध को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।


1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला द्वीप क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

केश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और इसका क्षेत्रफल करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर है। पहले इसकी पहचान पर्यटन और फ्री-ट्रेड जोन के रूप में थी, लेकिन समय के साथ यहां सैन्य गतिविधियों का विस्तार हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका की नजर में यह द्वीप कई सामरिक कारणों से ईरान की सैन्य ताकत का अहम केंद्र है।


द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का नेटवर्क

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केश्म द्वीप के भीतर और नीचे सुरंगों के साथ नमक की प्राकृतिक गुफाओं का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ईरान ने इनका इस्तेमाल सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए किया है। इन ठिकानों पर तटीय मिसाइल सिस्टम और तेजी से हमला करने वाली नौकाएं छिपाकर रखे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे समुद्र के रास्ते सैन्य गतिविधियों को संचालित करने में मदद मिल सकती है।


होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण से जुड़ा है पूरा मामला

केश्म द्वीप की अहमियत सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। यहां बनाए गए सैन्य अड्डों को होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। ईरान इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी के जरिए समुद्री मार्गों पर दबाव बना सकता है। माना जाता है कि जरूरत पड़ने पर यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रोकी या सीमित की जा सकती है।


दुनिया की तेल सप्लाई के लिए क्यों अहम है यह इलाका?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल और गैस परिवहन मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से होने वाली आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान केश्म द्वीप के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल तेल टैंकरों की आवाजाही रोकने या उन पर दबाव बनाने के लिए करता रहा है। यही वजह है कि इस द्वीप को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।


ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा हमले की संभावना से किया इनकार

धमाकों से पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई की तैयारी से इनकार किया था। उनका कहना था कि फिलहाल अमेरिका दोबारा हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि क्या मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमला करने का विकल्प विचाराधीन है? ट्रम्प ने इस सवाल का जवाब 'नहीं' में दिया। उन्होंने तेहरान के साथ बातचीत से समझौता होने की संभावना भी जताई। उनके रुख से संकेत मिला कि अमेरिका सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद कर रहा है।


ट्रम्प का दावा- युद्ध का खतरा घटने से सस्ता हुआ तेल

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ईरान के साथ बड़े युद्ध की आशंका कम होने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। उनके मुताबिक, तेल करीब 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता हुआ है।


उन्होंने इस गिरावट को रिकॉर्ड स्तर की कमी बताया। तेल की कीमतों में बदलाव के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 31 अक्टूबर: कच्चे तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल थी।

  • 1 नवंबर: कीमत घटकर 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।

  • कुल गिरावट: 10 डॉलर प्रति बैरल।

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