
अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन दिन के भीतर दूसरी बार सैन्य कार्रवाई की। मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई है।
ईरान के अनुसार सिरिक में एक शादी समारोह के दौरान मिसाइल गिरने से 5 लोगों की मौत और 68 लोग घायल हुए। इसी दौरान रूस से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक दिए जाने की एक रिपोर्ट ने भी सैन्य तनाव को नया आयाम दिया है।
सिरिक में शादी समारोह के दौरान हमला
ईरान के मुताबिक, सिरिक में हुए हमले के समय वहां शादी समारोह चल रहा था। मिसाइल गिरने के बाद बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। मेहर न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में 4 साल का एक बच्चा भी शामिल है। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में घायल बच्चों को अस्पताल में उपचार कराते हुए देखा गया।
खुजस्तान में भी जान-माल का नुकसान
खुजस्तान प्रांत में हुई सैन्य कार्रवाई में ईरानी पक्ष के अनुसार 7 लोगों की मौत हुई और 8 लोग घायल हुए।
अमेरिका ने इन हमलों को सैन्य कार्रवाई बताते हुए कहा है कि उसके निशाने पर ईरान के सैन्य ठिकाने थे।
ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में जवाबी कार्रवाई का दावा किया
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। ईरान के अनुसार, उसने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान के दावे के मुताबिक, इन हमलों में कई लोगों की मौत हुई है।
रूस पर ईरान को गुप्त मिसाइल तकनीक देने का आरोप
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच रूस से जुड़ी एक रिपोर्ट भी सामने आई है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, रूस कथित तौर पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीकी मदद दे रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों का यह कथित गुप्त कार्यक्रम 2023 से चल रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से कई गुना अधिक रफ्तार हासिल कर सकें।
क्या है C430L प्रोग्राम?
रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञों के शामिल होने की बात कही गई है। रूस कथित तौर पर ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में तकनीकी सहायता दे रहा है। इसी तकनीक से मिसाइल को अधिक गति देने में मदद मिल सकती है।
ईरान कर चुका है रैमजेट का फ्लाइट टेस्ट
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट सिस्टम तैयार कर चुका है और उसका फ्लाइट टेस्ट भी किया जा चुका है।
लेकिन अभी तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है कि रूस की मदद से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने वास्तविक सैन्य तैनाती में शामिल कर लिया है।
एयर डिफेंस के लिए क्यों चुनौती बन सकती है यह तकनीक?
रैमजेट आधारित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल एंटी-शिप और जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलों के तौर पर किया जा सकता है। इनकी ज्यादा रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बढ़ा सकती है। कम ऊंचाई और तेज गति के कारण ऐसी मिसाइलों को समय रहते पहचानकर रोकना कठिन हो सकता है।
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