
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव के बावजूद बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। दोनों देश फिलहाल मध्यस्थों के माध्यम से एक-दूसरे तक संदेश पहुंचा रहे हैं।
ईरान की ओर से रखा गया 7 दिन का प्रस्ताव इस कूटनीतिक गतिविधि का केंद्र बना हुआ है। तेहरान की मांगों पर अमेरिकी कदम के बाद होर्मुज खोलने और परमाणु मुद्दे समेत आगे की बातचीत शुरू करने की बात कही गई है।
न्यूयॉर्क से बाहर बातचीत की तैयारी
ईरान के पूर्व राजनयिक सैयद हादी अफकाही ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सार्वजनिक बयानों को अंतिम जवाब नहीं मान रहा है।
उनके अनुसार, न्यूयॉर्क में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के फैसलों और रुख को एक मध्यस्थ के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। दोनों पक्ष बातचीत को पूरी तरह खत्म होने से बचाने के लिए पर्दे के पीछे संपर्क बनाए हुए हैं।
अफकाही ने यह भी कहा कि भविष्य की वार्ता न्यूयॉर्क के बजाय किसी अरब या यूरोपीय देश में आयोजित हो सकती है और ईरान भी इसी विकल्प को चाहता है।
ईरान के 7 दिन के प्रस्ताव में क्या है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान प्रस्ताव रखा था। इसमें अमेरिका से कुछ कदम उठाने की मांग की गई है।
मुख्य शर्तें:
- ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना।
- ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत देना।
- ईरान की करीब 12 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी करना।
- क्षेत्र में जारी युद्ध को रोकना।
इन शर्तों को पूरा किए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे सहित अन्य विषयों पर वार्ता शुरू करने की रूपरेखा रखी है।
छठे दिन स्ट्रेट खोलने, सातवें दिन वार्ता का प्रस्ताव
अब्बास अराघची के मुताबिक प्रस्ताव में समयसीमा भी तय की गई है। अमेरिकी पक्ष से आवश्यक कदम उठाए जाने के बाद छठे दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जा सकता है।
इसके अगले दिन यानी सातवें दिन अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे और अन्य विषयों पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है। ईरान ने यह योजना मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाई थी।
ट्रंप ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया
ईरान का प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार नहीं किया है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच मध्यस्थों की भूमिका खत्म नहीं हुई। हालिया संपर्क इसी चैनल के जरिए आगे बढ़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, 28 सितंबर को अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने मध्यस्थों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और सात दिन की योजना में संभावित बदलावों पर चर्चा हुई।
कतर और पाकिस्तान पहुंचा रहे संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी दोनों देशों के बीच सीधे संवाद के बजाय मध्यस्थों ने संपर्क बनाए रखा था। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा था कि मध्यस्थ अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच संदेश लेकर आ-जा रहे थे।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी कहा था कि कतर और पाकिस्तान ईरान के संदेश अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा रहे हैं। कतर की मध्यस्थता में अब्बास अराघची और अमेरिकी पक्ष के बीच अलग-अलग संपर्क जारी रहने की बात सामने आई है।
आगे क्या हो सकता है?
मौजूदा कूटनीतिक गतिविधि का अगला अहम चरण अमेरिका के जवाब और सात दिन के प्रस्ताव में संभावित बदलावों पर निर्भर है। ईरान होर्मुज खोलने को अपनी शर्तों से जोड़ रहा है, जबकि मध्यस्थ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
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