
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की तैयारियां तेज हैं, लेकिन इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नई रिपोर्ट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया युद्ध के बाद ईरान पहले से ज्यादा रणनीतिक रूप से मजबूत हुआ है और अब उसके पास वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित करने की क्षमता पहले से अधिक मानी जा रही है।
ईरान को लेकर अमेरिकी एजेंसियों का बड़ा आकलन
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि युद्ध के बाद ईरान की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अधिकारियों का आकलन है कि जरूरत पड़ने पर वह होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही को प्रभावित करने की क्षमता रखता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में परमाणु वार्ता विफल होती है, तो ईरान यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में भी तनाव बढ़ा सकता है। इससे दुनिया के दो प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग एक साथ प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
19 जून को हो सकता है शांति समझौता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। समझौते का आयोजन स्विट्जरलैंड के लूसर्न के पास स्थित बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
समझौते में क्या-क्या शामिल हो सकता है?
रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित 14 बिंदुओं वाले दस्तावेज़ में कई अहम प्रावधान शामिल हैं। इनमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने, ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत, तेल निर्यात जारी रखने की अनुमति, विदेशों में जमे ईरानी फंड जारी करने और आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़े निवेश जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं।
होर्मुज में लौटने लगा जहाजों का भरोसा
मैरीटाइम एनालिसिस फर्म विंडवर्ड के अनुसार मंगलवार को 14 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे, जो जून महीने का सबसे बड़ा दैनिक आंकड़ा है। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले के स्तर से अभी काफी कम है। रिपोर्टों के मुताबिक संघर्ष से पहले इस समुद्री मार्ग से औसतन करीब 130 जहाज प्रतिदिन गुजरते थे। कई शिपिंग कंपनियों का कहना है कि वे तब तक सामान्य परिचालन शुरू नहीं करेंगी, जब तक जहाजों पर हमले का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।
ट्रम्प सरकार पर विपक्ष के तीखे सवाल
शांति समझौते को लेकर अमेरिका की घरेलू राजनीति भी गर्म हो गई है। डेमोक्रेट नेताओं और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस समझौते को ट्रम्प प्रशासन की उपलब्धि मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि यह समझौता अमेरिका की मजबूती नहीं बल्कि उसकी रणनीतिक मजबूरी को दर्शाता है।
रक्षा मंत्री के इंटरव्यू पर भी उठा विवाद
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के एक इंटरव्यू की भी खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिका का होर्मुज पर नियंत्रण बना रहा। लेकिन जब पत्रकार मार्गरेट ब्रेनन ने सवाल किया कि यदि नियंत्रण पूरी तरह अमेरिका के पास था, तो फिर बातचीत में होर्मुज को दोबारा खोलना इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना, तो मंत्री का जवाब स्पष्ट नहीं माना गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना तेज हो गई।
विपक्ष ने समझौते को बताया 'सरेंडर लेटर'
अमेरिका के डेमोक्रेट सांसदों ने इस प्रस्तावित समझौते को 'सरेंडर लेटर' तक करार दिया। उनका कहना है कि यह समझौता अमेरिका के लिए लाभदायक नहीं दिखता और इससे यह संदेश जाता है कि ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के सामने झुककर समझौता किया है। वहीं ट्रम्प सरकार अब भी इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रही है।
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