
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश अमेरिकी सीनेट में सफल नहीं हो सकी। गुरुवार को हुई वोटिंग में प्रस्ताव को 49 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि 50 सांसद इसके विरोध में रहे।
इस घटनाक्रम के साथ ही राष्ट्रपति को ईरान पर सैन्य कार्रवाई से पहले संसद की मंजूरी लेने की अनिवार्यता लागू नहीं हो सकी। उधर, भारत सरकार ने संसद में पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े भारतीय नागरिकों के नुकसान और राहत अभियान का विस्तृत ब्यौरा भी पेश किया।
सीनेट में एक वोट से बदला नतीजा
अमेरिकी सीनेट में पेश प्रस्ताव का उद्देश्य यह था कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले राष्ट्रपति को संसद की स्वीकृति लेनी पड़े। वोटिंग में प्रस्ताव आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के सांसद डेव मैककॉर्मिक मतदान में शामिल नहीं हुए। प्रस्ताव गिरने के बाद राष्ट्रपति के अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
विपक्ष की क्या है मांग
विपक्षी सांसदों का कहना है कि ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम निर्णय संसद की मंजूरी के बाद ही होना चाहिए। यह प्रस्ताव अभी अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी समिति के पास है। इसे दोबारा सीनेट में लाने के लिए नई प्रक्रिया अपनानी होगी।
संसद में सरकार ने जारी किए भारतीयों से जुड़े आंकड़े
राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। इनमें 10 भारतीय नाविक भी शामिल हैं। सरकार के अनुसार, इस दौरान 75 भारतीय घायल हुए हैं।
किन देशों में कितनी मौतें
ओमान: 8
UAE: 4
कुवैत: 2
सऊदी अरब: 1
इराक: 1
घायलों का देशवार विवरण
UAE: 32
ओमान: 24
कुवैत: 13
कतर: 4
सऊदी अरब: 1
इजराइल: 1
ईरान से भारतीयों का सुरक्षित निकास
सरकार ने संसद को बताया कि ईरान में फंसे 2,557 भारतीयों को अर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला गया।
नाविकों के परिवारों को मुआवजा
युद्ध क्षेत्र में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के परिजनों को डीजीएमए वेलफेयर स्कीम के तहत 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने बताया कि 16 मामलों में से अब तक 5 परिवारों को यह मुआवजा जारी किया जा चुका है।
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