
ईरान के संसद अध्यक्ष और अमेरिका-ईरान वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब युद्ध से पहले जैसी नहीं रहने वाली है। उनका कहना है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की निगरानी आगे ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जारी रहेगा।
उधर, परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच नए दावों और प्रस्तावों ने भी चर्चा तेज कर दी है। दोनों देशों के बयान कई मुद्दों पर अलग-अलग नजर आ रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्या बोले गालिबाफ?
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी प्रेस टीवी के अनुसार, स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत के पहले चरण के बाद मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसी परिस्थितियों में नहीं लौटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की देखरेख ईरान अपने तरीके से करेगा। साथ ही यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान और पालन जारी रखा जाएगा।
अमेरिका पर भरोसे को लेकर दोहराया पुराना रुख
गालिबाफ ने अमेरिका को लेकर ईरान का रुख भी दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी अमेरिका पर भरोसा नहीं किया और आगे भी सतर्क रहना ही समझदारी होगी। उनके अनुसार, ईरान की नीति पहले भी सावधानी की रही है और भविष्य में भी यही दृष्टिकोण जारी रहेगा।
परमाणु ठिकानों की जांच को लेकर दोनों देशों के अलग दावे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। हालांकि ईरान ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। तेहरान का कहना है कि परमाणु मुद्दे पर किसी नई सहमति तक पहुंचने की बात सही नहीं है और इस विषय पर कोई नया समझौता नहीं हुआ है।
तेल प्रतिबंधों में 60 दिन की राहत
स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल से जुड़ी कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। यह कदम दोनों देशों के बीच जारी संवाद के बीच सामने आया है, हालांकि अन्य मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
फ्रीज्ड फंड जारी करने की योजना पर काम
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और कतर एक ऐसी योजना तैयार कर रहे हैं, जिसके जरिए ईरान की फंसी हुई अरबों डॉलर की राशि मानवीय जरूरतों के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। प्रस्ताव के अनुसार शुरुआती चरण में ईरान को कतर में रखे गए फंड से करीब 6 अरब डॉलर तक पहुंच मिल सकती है।
किन कामों में इस्तेमाल होगा पैसा?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का केंद्रीय बैंक इस धनराशि का उपयोग खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य मानवीय जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की खरीद के लिए कर सकेगा। यह भी कहा गया है कि फंड जारी करने की पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत होगी, ताकि धन का उपयोग केवल तय मानवीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।
अभी अंतिम सहमति नहीं
फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना पर ईरान की ओर से अभी कोई अंतिम मंजूरी या सहमति नहीं दी गई है। यानी फ्रीज्ड फंड तक पहुंच को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन इसे लागू करने पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
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