
मिडिल-ईस्ट में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान संभावित नए युद्ध की तैयारी में जुट गया है और उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान अब होर्मुज स्ट्रेट को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है। यही वजह है कि पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं।
तीन मोर्चों पर तैयारी कर रहा ईरान
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी नेतृत्व फिलहाल तीन अहम मोर्चों पर काम कर रहा है—
- सैन्य तैयारी
- घरेलू समर्थन मजबूत करना
- कूटनीतिक रणनीति
हालांकि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी सेना और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यही कारण है कि ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के तौर पर देख रहा है। यदि इस समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिका के ठिकानों को लेकर चेतावनी
ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि यदि नया संघर्ष शुरू होता है, तो अमेरिका के सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर हो सकते हैं। कुछ दिन पहले IRGC ने भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि किसी नए अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा “हिंसक” होगा और उसका असर मिडिल-ईस्ट से बाहर तक महसूस किया जा सकता है।
दुनिया की बढ़ सकती हैं चिंताएं
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल-ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में उछाल, समुद्री व्यापार में बाधा और वैश्विक सुरक्षा संकट जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि दुनिया की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट और ईरान-अमेरिका संबंधों पर टिकी हुई है।
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