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ईरान ने जुटाए 10 लाख सैनिक, US भी भेजेगा 10 हजार जवान, बड़े युद्ध की आहट

27 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ईरान ने जुटाए 10 लाख सैनिक, US भी भेजेगा 10 हजार जवान, बड़े युद्ध की आहट
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने 10 लाख से ज्यादा सैनिक तैयार कर लिए हैं, जबकि अमेरिका भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुट गया है। यह टकराव अब बड़े युद्ध की आहट दे रहा है…


ईरान का दावा—10 लाख सैनिक तैयार

Iran के सरकारी मीडिया के मुताबिक, देश ने संभावित जमीनी हमले के खतरे को देखते हुए 10 लाख से अधिक ग्राउंड सैनिक जुटा लिए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि United States किसी भी समय जमीनी हमला कर सकता है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं…


युवाओं में सेना में भर्ती की होड़

तनाव बढ़ने के साथ ही ईरान में युवाओं का रुख भी बदल रहा है। बड़ी संख्या में युवा Basij, Islamic Revolutionary Guard Corps और नियमित सेना में भर्ती के लिए आवेदन कर रहे हैं। यह दिखाता है कि देश के अंदर युद्ध को लेकर माहौल तेजी से तैयार हो रहा है…


अमेरिका भी बढ़ा रहा सैन्य दबाव

दूसरी ओर United States मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इनमें पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं, जो पहले से तैनात 5,000 मरीन और 2,000 पैराट्रूपर्स के साथ जुड़ेंगे…


82वीं एयरबोर्न डिवीजन भी अलर्ट

अमेरिकी सेना की मशहूर 82nd Airborne Division के पैराट्रूपर्स पहले से ही क्षेत्र में मौजूद हैं। अगर अतिरिक्त सैनिक भेजे जाते हैं, तो यह संकेत होगा कि अमेरिका किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में है…


ईरान का आरोप—जबरन थोपा गया युद्ध

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ईरान पर एक “गैरकानूनी युद्ध” थोपा गया है और यह तब हुआ जब परमाणु बातचीत जारी थी…


स्कूलों पर हमले, भारी नुकसान का दावा

ईरान के मुताबिक, हालिया हमलों में 600 से ज्यादा स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 1000 से अधिक छात्र और शिक्षक मारे गए या घायल हुए हैं। इन दावों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ा दी है…


क्यों खतरनाक है यह टकराव?

मिडिल ईस्ट पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र है, जहां किसी भी बड़े संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। तेल की कीमतें, वैश्विक व्यापार और सुरक्षा—सब कुछ इस टकराव से प्रभावित हो सकता है…


आगे क्या? युद्ध या कूटनीति

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह तनाव युद्ध में बदल जाएगा या कूटनीति इसे रोक पाएगी? अगर हालात काबू में नहीं आए, तो यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बन सकता है…

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