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ईरान युद्ध पर ट्रम्प-नेतन्याहू में टकराव, अमेरिका ने आखिरी वक्त पर रोका बड़ा हमला

21 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ईरान युद्ध पर ट्रम्प-नेतन्याहू में टकराव, अमेरिका ने आखिरी वक्त पर रोका बड़ा हमला
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच बड़ा मतभेद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान पर हमले जारी रहें, जबकि ट्रम्प फिलहाल बातचीत और संभावित डील को मौका देना चाहते हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की राजनीति को अचानक और गर्मा दिया है।


एक घंटे तक चली ट्रम्प-नेतन्याहू की बातचीत

रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि नेतन्याहू ने ट्रम्प से साफ कहा कि ईरान पर प्रस्तावित हमलों को रोकना बड़ी गलती होगी। नेतन्याहू का मानना है कि सैन्य दबाव बनाए रखना जरूरी है। वहीं ट्रम्प का रुख फिलहाल युद्ध को सीमित रखने और बातचीत के विकल्प खुले रखने का बताया जा रहा है।


अमेरिका करने वाला था ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’

CNN के मुताबिक ट्रम्प ने रविवार को नेतन्याहू को जानकारी दी थी कि अमेरिका ईरान पर नए टारगेटेड हमलों की तैयारी कर रहा है। इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन स्लेजहैमर’ नाम दिया गया था। माना जा रहा था कि यह ऑपरेशन ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया था। लेकिन इसके बाद अचानक बड़ा यू-टर्न देखने को मिला।


24 घंटे में बदला अमेरिका का फैसला

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 24 घंटे के भीतर ट्रम्प प्रशासन ने हमलों को फिलहाल रोकने का फैसला कर लिया। ट्रम्प ने घोषणा की कि मंगलवार के लिए तय सैन्य कार्रवाई स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देशों की अपील के बाद यह फैसला लिया गया। इन देशों ने क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका को देखते हुए तनाव कम करने की मांग की थी।


खाड़ी देशों की चिंता ने बदला समीकरण

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान के खिलाफ सीधा बड़ा हमला पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक दे। खाड़ी देशों की चिंता तेल सप्लाई, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है।


इजराइल क्यों चाहता है लगातार हमला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं और उसके सहयोगी नेटवर्क को कमजोर करने का यही सही समय है। नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के खिलाफ आक्रामक रणनीति के पक्ष में रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने ट्रम्प से हमले रोकने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा।


मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव

हालांकि फिलहाल हमला टाल दिया गया है, लेकिन अमेरिका और इजराइल के बीच उभरे मतभेद ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव और बढ़ सकता है। खासकर अगर बातचीत की कोशिशें विफल होती हैं, तो क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका फिर तेज हो सकती है।

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