मंगलवार, 31 मार्च 2026
Logo
International

इटली ने अपनी जमीन पर अमेरिकी विमानों को लैंड करने से रोका, ईरान के इस्फहान में बंकर-बस्टर बमों से तबाही — यूरोप में महंगाई की आग भड़की

31 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
इटली ने अपनी जमीन पर अमेरिकी विमानों को लैंड करने से रोका, ईरान के इस्फहान में बंकर-बस्टर बमों से तबाही — यूरोप में महंगाई की आग भड़की
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इटली ने अपने सिगोनेला मिलिट्री बेस पर अमेरिकी बॉम्बर विमानों की लैंडिंग से साफ इनकार कर दिया। उधर अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बम गिराकर एक बड़े हथियार डिपो को राख कर दिया। मिडिल ईस्ट की यह जंग अब यूरोप की जेब पर भी भारी पड़ने लगी है।


इटली का कड़ा रुख — "पहले पूछो, फिर आओ"

सिसिली आइलैंड पर मौजूद सिगोनेला एयरबेस NATO का एक अहम सैन्य ठिकाना है। अमेरिका चाहता था कि उसके बॉम्बर विमान यहां रुककर मिडिल ईस्ट की ओर आगे बढ़ें। लेकिन रोम सरकार को इस पूरे प्लान की भनक तक नहीं दी गई थी। इटली ने साफ कहा — बिना इजाजत के कोई ऑपरेशन नहीं चलेगा। यह कदम सिर्फ नाराजगी नहीं, बल्कि एक सोवरेन देश का संप्रभुता का दावा है। NATO सहयोगी होने के बावजूद इटली इस बार अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं दिखा।


स्पेन भी आ चुका है इसी राह पर

इटली से पहले स्पेन ने भी यही रुख अपनाया था। स्पेन ने ईरान ऑपरेशन में हिस्सा ले रहे अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया। यूरोप के दो बड़े NATO सदस्यों का यह रवैया अमेरिका के लिए एक गंभीर कूटनीतिक चेतावनी है। यह सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है — क्या पश्चिमी गठबंधन में दरारें चौड़ी हो रही हैं?


इस्फहान में बंकर-बस्टर बमों की दहशत

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने सोमवार रात ईरान के इस्फहान शहर में एक विशाल भूमिगत हथियार डिपो को निशाना बनाया। इस हमले में 2000 पाउंड वजनी बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया — जो खास तौर पर जमीन के अंदर बने मजबूत बंकरों को ध्वस्त करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में एक के बाद एक विस्फोट होते रहे। आग के विशाल गुबार आसमान तक उठे। खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इन धमाकों का वीडियो शेयर किया।


ट्रम्प बोले — "होर्मुज जाओ, वरना हमसे तेल खरीदो"

ट्रम्प ने यूरोपीय देशों को सीधा संदेश दिया — होर्मुज स्ट्रेट से तेल लेने की हिम्मत है तो जाओ, नहीं तो अमेरिका से खरीदो। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास भरपूर तेल भंडार है। ट्रम्प का लहजा और भी तीखा था — उन्होंने कहा कि जिन देशों ने अमेरिका की मदद नहीं की, वे अब अमेरिका की मदद की उम्मीद न रखें। साथ ही दावा किया कि ईरान काफी हद तक कमजोर पड़ चुका है।


रूस का इशारा — "तेल के लिए हो रही है यह जंग"

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस पूरे संघर्ष पर एक बड़ा बयान दिया। उनके मुताबिक अमेरिका और इजराइल नहीं चाहते कि ईरान और उसके पड़ोसी देश आपस में स्थिर संबंध बनाएं। लावरोव ने 'रेजीम चेंज' की चर्चाओं को भी खारिज करते हुए कहा कि इस पूरे खेल का असली मकसद तेल और गैस संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करना है। यह बयान उस वक्त आया जब दुनिया की नज़रें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं।


यूरोप की थाली भी हुई महंगी

मिडिल ईस्ट की जंग की आंच यूरोपीय आम नागरिक तक पहुंच गई है। यूरोस्टेट के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में यूरोज़ोन की महंगाई 2.5% तक पहुंच गई — जो फरवरी में 1.9% थी। इस उछाल की सबसे बड़ी वजह ऊर्जा की कीमतें हैं। मार्च में तेल-गैस की कीमतें 4.9% बढ़ गईं। फरवरी में यही कीमतें घट रही थीं — यानी सिर्फ एक महीने में पूरा पलड़ा पलट गया। जंग अगर और लंबी खिंची तो यूरोप की अर्थव्यवस्था पर दबाव और गहरा होता जाएगा।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें