
नेपाल में बुधवार की विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास पहाड़ों में बनी दो नई झीलों ने खतरा बढ़ा दिया है। एक झील से पानी लगातार बाहर निकल रहा है, जबकि दूसरी झील का जलस्तर और आकार बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि दूसरी झील का बांध टूटने पर बड़े पैमाने पर पानी नीचे की ओर पहुंच सकता है।
दूसरी झील को लेकर वैज्ञानिकों ने जताई गंभीर चिंता
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ऊपर बनी दूसरी झील को वैज्ञानिक अस्थिर मान रहे हैं। वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल ने CNN से बातचीत में कहा कि झील में जमा पानी और उसका बांध कभी भी टूट सकता है। कार्गेल के मुताबिक, पहली झील का बांध शुक्रवार को टूट चुका है। यदि दूसरी झील भी टूटती है तो उसका पानी पहली झील में जा सकता है और दोनों झीलों से पानी एक साथ तेजी से नीचे आने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने रेस्क्यू टीमों को ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए हर समय तैयार रहने की जरूरत बताई है।
बुधवार की बाढ़ में भारी मात्रा में मलबा बहकर आया
नेपाल-चीन सीमा के इसी क्षेत्र में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। पानी के तेज बहाव के साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें नीचे के इलाकों तक पहुंच गई थीं। जेफ्री कार्गेल के अनुसार, बाढ़ के साथ आया मलबा कम से कम 5 लाख बड़े डंप ट्रकों में समाने वाली मात्रा के बराबर था। दोनों झीलें उसी क्षेत्र के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं, जहां बुधवार की बाढ़ में सैकड़ों लोगों की जान गई थी।
नेपाल और तिब्बत में 633 लोगों की मौत
इस आपदा ने नेपाल और तिब्बत दोनों को प्रभावित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 320 भारतीय शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं।
5 जिलों की 15 लोकल बॉडी इमरजेंसी क्षेत्र घोषित
बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में राहत एवं पुनर्वास अभियान तेज करने के लिए नेपाल सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाया है। सरकार ने 5 जिलों की 15 लोकल बॉडी को आपदा प्रभावित-इमरजेंसी क्षेत्र घोषित किया है। इस फैसले का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों को गति देना है।
80 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त
आपदा का असर नेपाल के परिवहन ढांचे पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ से 80 पुल और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। चीन की सीमा के नजदीक प्रभावित क्षेत्र में सड़क और पुलों का नेटवर्क व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इन्हीं मार्गों के जरिए चीन से नेपाल में सामान आता है और नेपाल से भी सामान बाहर भेजा जाता है।
बाढ़ से नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव
प्राकृतिक आपदा ने नेपाल की नई सरकार के सामने आर्थिक चुनौती भी बढ़ा दी है। देश की अर्थव्यवस्था विदेशी सहायता, विदेशों में काम कर रहे नेपाली नागरिकों से मिलने वाली रकम और चीन-भारत से होने वाली सामान की आपूर्ति पर काफी निर्भर है।
सीमा क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को हुए नुकसान का असर इस आर्थिक निर्भरता पर भी पड़ रहा है। चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
अभी भी बना हुआ है दोबारा तबाही का खतरा
पहली झील का बांध टूटने और दूसरी झील के लगातार बढ़ने की स्थिति ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की चुनौती को और गंभीर बना दिया है। यदि दूसरी झील का बांध टूटता है तो पानी के बड़े प्रवाह से नीचे के इलाकों में दोबारा बाढ़ या भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता है।
इसलिए प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दलों के सामने तत्काल चुनौती केवल बाढ़ से हुए नुकसान से निपटना नहीं, बल्कि पहाड़ों में बनी इन नई झीलों से पैदा हुए संभावित खतरे पर भी नजर रखना है।
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