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ईरान-अमेरिका टकराव से हिला तेल बाजार: हॉर्मुज संकट के बीच रूस की कमाई में जबरदस्त उछाल, रोजाना अरबों का फायदा
14 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
ईरान-अमेरिका टकराव से हिला तेल बाजार: हॉर्मुज संकट के बीच रूस की कमाई में जबरदस्त उछाल, रोजाना अरबों का फायदा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया के तेल बाजार को झकझोर दिया है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के टकराव के कारण ऊर्जा सप्लाई में बड़ी रुकावट आ गई है। कई देशों को तेल की कमी का डर सता रहा है, लेकिन इसी उथल-पुथल के बीच रूस की तेल कमाई तेजी से बढ़ती दिख रही है।


हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव से तेल सप्लाई पर असर

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोकने की धमकी और रुकावटों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस रुकावट की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता कम हुई और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।


युद्ध का फायदा: रूस की तेल आय में बड़ा उछाल

ऊर्जा विश्लेषण संस्थान Centre for Research on Energy and Clean Air के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक कीमतों में तेजी आने के बाद रूस की जीवाश्म ईंधन से रोजाना कमाई बढ़कर करीब 510 मिलियन यूरो (550 मिलियन डॉलर से अधिक) हो गई है। यह आंकड़ा फरवरी के औसत से करीब 14 प्रतिशत ज्यादा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट के कारण रूस को हर दिन लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1250 करोड़ रुपये) तक का अतिरिक्त लाभ हो रहा है।


केवल कीमत बढ़ने से ही अरबों का फायदा

तेल बाजार में उछाल ने रूस के लिए अतिरिक्त कमाई का नया रास्ता खोल दिया है। केवल कीमत बढ़ने से रूस को लगभग 45 मिलियन यूरो प्रतिदिन अतिरिक्त आय हो रही है। संघर्ष के शुरुआती दो हफ्तों में ही रूस को लगभग 6 अरब यूरो तक का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है। इसका सीधा असर रूस की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व पर भी पड़ा है।


भारत और चीन ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद

मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने के बाद एशियाई देशों की रिफाइनरियों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी। इसी कारण भारत और चीन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेजी दिखाई है। मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी Kpler के मुताबिक, फरवरी के अंत से रूसी तेल से भरे टैंकरों में तैरते स्टोरेज की मात्रा 1.8 करोड़ से घटकर लगभग 3.2 करोड़ बैरल कम हो गई है। इसका मतलब है कि पहले जो कार्गो बिना खरीदार के पड़े थे, उन्हें तेजी से खरीद लिया गया। इसके साथ ही चीन की कुछ सरकारी ऊर्जा कंपनियों ने गर्मियों तक के लिए रूसी तेल खरीदने के दीर्घकालिक समझौते भी किए हैं।


बजट लक्ष्य से ऊपर पहुंचा रूस का यूराल्स क्रूड

रूस के प्रमुख निर्यात ग्रेड यूराल्स क्रूड की कीमत भी बढ़कर लगभग 62 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रूस ने अपने संघीय बजट में तेल की कीमत का अनुमान 59 डॉलर प्रति बैरल रखा था, इसलिए मौजूदा कीमतें उसके लिए अतिरिक्त राजस्व का मौका बन गई हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से रूसी खजाने में अनुमानित 1.3 से 1.9 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त टैक्स राजस्व पहुंच चुका है।


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।


संभावित असर:

तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी

वैश्विक महंगाई पर दबाव

सप्लाई चेन में नई बाधाएं

ऊर्जा आयातक देशों की लागत बढ़ना


हालांकि फिलहाल इस संकट का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ रूस को मिलता दिखाई दे रहा है।

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