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पानी पर बढ़ा तनाव! सिंधु जल संधि स्थगित होने के बीच पाकिस्तान ने दी युद्ध की धमकी

22 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पानी पर बढ़ा तनाव! सिंधु जल संधि स्थगित होने के बीच पाकिस्तान ने दी युद्ध की धमकी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

सिंधु जल संधि के निलंबन को लेकर पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश को जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो भारत के खिलाफ युद्ध भी छेड़ा जा सकता है।


पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी माना कि पिछले एक वर्ष में इस मुद्दे पर हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।


भारत ने क्यों स्थगित की सिंधु जल संधि?

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा।


पाकिस्तान में गहराया जल संकट

रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सबसे ज्यादा असर सिंध और बलूचिस्तान में देखा जा रहा है।


सिंध सिंचाई विभाग के अनुसार

- नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1% पानी की कमी।

- राइस कैनाल में 38% पानी की कमी।

- दादू कैनाल में 82% तक पानी की कमी।


सुक्कुर बैराज में भी पानी का स्तर घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।


क्या है सिंधु जल समझौता?

सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां शामिल हैं

- सिंधु

- झेलम

- चिनाब

- रावी

- ब्यास

- सतलुज


इन नदियों का जलग्रहण क्षेत्र करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है।


इस क्षेत्र का


- 47% हिस्सा पाकिस्तान,

- 39% भारत,

- 8% चीन,

- 6% अफगानिस्तान में आता है।


करीब 30 करोड़ लोग इस नदी तंत्र पर निर्भर हैं।


समझौते तक कैसे पहुंचा मामला?

भारत और पाकिस्तान के विभाजन से पहले ही पंजाब और सिंध क्षेत्र में पानी के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो चुका था।

- 1947 में दोनों देशों के इंजीनियरों के बीच स्टैंडस्टिल समझौता हुआ।

- यह 31 मार्च 1948 तक प्रभावी रहा।

- 1 अप्रैल 1948 को समझौता समाप्त होने के बाद भारत ने दोनों प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया।

- इससे पाकिस्तान के पंजाब की करीब 17 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई।

- बाद में नया समझौता हुआ और पानी की आपूर्ति फिर शुरू हुई।


इसके बाद 1951 से 1960 तक विश्व बैंक की मध्यस्थता में बातचीत चली और 19 सितंबर 1960 को कराची में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।


संधि स्थगित रहने से पाकिस्तान पर क्या असर?

पाकिस्तान में खेती की लगभग 90% जमीन, यानी करीब 4.7 करोड़ एकड़ क्षेत्र की सिंचाई सिंधु नदी प्रणाली से होती है।

- देश की राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 23% है।

- करीब 68% ग्रामीण आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है।


संधि स्थगित रहने से आम लोगों के साथ-साथ कृषि और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है असर

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है और उत्पादन में 30% से 50% तक कमी आने की आशंका जताई गई है। इससे औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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