
दुनिया की बदलती आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की भूमिका को अवसर पैदा करने, वैश्विक सहयोग बढ़ाने और दूसरे देशों को सक्षम बनाने से जोड़ा है। दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उन्होंने डिजिटल तकनीक, वैक्सीन आपूर्ति, आर्थिक सुधार और भारत की विकास दर का जिक्र किया।
करीब 25 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बीते एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने भारत की 7.8% GDP ग्रोथ, 700 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार और कोविड के दौरान 100 से ज्यादा देशों तक वैक्सीन पहुंचाने का उल्लेख भी किया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी देश के ज्ञान, धन और शक्ति का वास्तविक महत्व इस बात से तय होता है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता है। भारत की भूमिका को उन्होंने दूसरे देशों के लिए अवसर बनाने और राष्ट्रों के बीच सहयोग बढ़ाने से जोड़ा।
भारत ने दुनिया को शून्य दिया, लेकिन इसके बदले कभी श्रेय या रॉयल्टी की मांग नहीं की। प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के जरिए भारत की उस सोच को रेखांकित किया, जिसमें अपनी क्षमताओं का लाभ व्यापक मानवता तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है।
कोविड के दौरान 100 से अधिक देशों तक पहुंची वैक्सीन
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के योगदान का जिक्र करते हुए बताया कि कोरोना महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की गई। उनके अनुसार, भारत अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल अपने हितों तक सीमित रखने के बजाय पूरी मानवता के लाभ के लिए करना चाहता है।
उनके संबोधन में डिजिटल तकनीक और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग की जरूरत भी प्रमुख रही। बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में भरोसेमंद साझेदारों की भूमिका को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
AI, ऊर्जा और खनिजों से बदल रहे वैश्विक समीकरण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के साथ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्वरूप भी बदल रहा है। प्रधानमंत्री ने सप्लाई चेन, ऊर्जा संसाधनों, खनिजों और तकनीक को उन क्षेत्रों में शामिल किया, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने ऐसे दौर में विश्वसनीय भागीदारों की आवश्यकता पर जोर दिया। फोरम की चर्चा में वैश्विक व्यापार, निवेश, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और सामान की आपूर्ति जैसे विषय भी शामिल हैं।
सरकार का दावा: एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को इस स्थिति में लाना है, जहां वे अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ सकें। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।
स्टार्टअप के अवसरों का विस्तार छोटे शहरों तक होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके मुताबिक, विकास का उद्देश्य लोगों को अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद देना है।
7.8% विकास दर और 700 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार
आर्थिक सुधारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रहने की बात कही। उन्होंने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को 700 अरब डॉलर से अधिक बताया।
प्रधानमंत्री ने कारोबार करना आसान बनाने और लगातार सुधारों को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया। उनके संबोधन में आर्थिक प्रदर्शन के साथ भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को भी प्रमुखता मिली।
सस्ते मोबाइल डेटा से छोटे शहरों के छात्रों को फायदा
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 के बाद मोबाइल डेटा की कीमतों में आई कमी को डिजिटल अवसरों के विस्तार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इससे छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई और जानकारी हासिल करना आसान हुआ है।
डिजिटल पहुंच ने रोजगार से जुड़े अवसरों तक पहुंचने के नए रास्ते भी खोले हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन में तकनीक को आम लोगों की क्षमताएं बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में पेश किया गया।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार का मुद्दा
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि देश में भ्रष्टाचार कम हुआ है। उन्होंने सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने की बात कही।
शासन की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताया। उनके अनुसार, सरकार का काम केवल शक्ति का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सशक्त बनाना और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
15 अक्टूबर को समाप्त होगा तीन दिवसीय फोरम
दिल्ली में पहली बार आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का कार्यक्रम 15 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस वर्ष इसकी थीम 'बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना' रखी गई है।
इस मंच की शुरुआत 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर चर्चा करना और उनके समाधान खोजने के लिए सरकार तथा निजी क्षेत्र के प्रमुख लोगों को एक साथ लाना है।
फोरम में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, बड़ी कंपनियों के CEO, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी होती है। यहां वैश्विक व्यापार, निवेश, AI, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सप्लाई चेन और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है।
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