
PoK में विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ विरोध हिंसक हो गया है। पुलिस फायरिंग में 30 प्रदर्शनकारियों की मौत और 50 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने टीवी इंटरव्यू में कहा कि सरकार विरोधी प्रदर्शन करने वालों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं और ऐसे लोगों से किसी प्रकार की बातचीत नहीं होगी।
ख्वाजा आसिफ का बयान विवाद के केंद्र में
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि सरकार विरोधी आंदोलन चला रहे लोगों के साथ बातचीत का कोई विकल्प नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसे प्रदर्शनकारी पाकिस्तान के विरोधी हैं और उन्हें भारत की तरह दुश्मन माना जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चुनाव विरोधी आंदोलन हिंसक टकराव में बदल चुका है।
प्रदर्शन के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
हिंसा के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे PoK में अतिरिक्त सेना, पैरा मिलिट्री और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी की तैनाती कर दी है। साथ ही पूरे क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं।
5 हजार लोगों के मार्च के दौरान हुई फायरिंग
मंगलवार को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले करीब 5 हजार लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। JAAC का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
क्या है 12 शरणार्थी सीटों का विवाद?
PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं।
8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए हैं।
45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं।
इन्हीं 45 सीटों में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे।
इन सीटों के मतदाता PoK में नहीं बल्कि पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य इलाकों में रहते हैं।
इस बार इन 12 सीटों पर करीब 6 लाख मतदाता मतदान करेंगे।
JAAC क्यों कर रहा है विरोध?
JAAC का कहना है कि शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों के माध्यम से इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां PoK की सरकार के गठन को प्रभावित करती हैं। संगठन की मांग है कि विधानसभा चुनने का अधिकार केवल PoK में रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और शरणार्थी सीटों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त की जाए।
विपक्षी दलों का भी आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। इसी वजह से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) सहित कई दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।
JAAC क्या है?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों और सामाजिक संगठनों का गठबंधन है। यह संगठन पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय अधिकारों और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन करता रहा है। 2024 में भी उसने महंगाई, बिजली बिल और टैक्स के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया था।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
भारत ने PoK में हो रहे चुनाव को खारिज करते हुए इसे 'दिखावटी कवायद' बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया के जरिए अपने अवैध कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है।
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