
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के खिलाफ एक बार गीदड़भप्की सामने आई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी में किसी तरह की कटौती या रोक स्वीकार नहीं की जाएगी और ऐसी कोशिश का जवाब दिया जाएगा।
इस्लामाबाद में गुरुवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए शरीफ ने कश्मीर, चीन-पाकिस्तान संबंध, मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष और अफगानिस्तान समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान का रुख रखा।
पानी के मुद्दे पर भारत को सख्त संदेश
शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी को लेकर किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है। उनके मुताबिक पानी का प्रवाह रोकने या घटाने की कोशिश हुई तो पाकिस्तान इसका कड़ा जवाब देगा। सिंधु जल समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से तनाव बना हुआ है। अप्रैल 2025 में भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया था।
भारत का पक्ष है कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक संधि का निलंबन जारी रहेगा। पाकिस्तान इसे कानूनी रूप से प्रभावी मानता है और एकतरफा निलंबन को स्वीकार नहीं करता।
1960 में हुआ था भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता
19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने सिंधु जल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते में सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल की व्यवस्था तय की गई थी। इसके तहत पूर्वी क्षेत्र की 3 नदियों का पानी भारत और पश्चिमी क्षेत्र की 3 नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया। करीब 65 साल तक यह व्यवस्था चली। अप्रैल 2025 में भारत के फैसले के बाद पानी का यह मुद्दा दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव का प्रमुख विषय बन गया।
कश्मीर पर पुराना रुख कायम रखने की बात
इस्लामाबाद के कार्यक्रम में शरीफ ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नीति में किसी बदलाव से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। उन्होंने अपने भाषण में फिलिस्तीन का भी जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तान वहां के लोगों के अधिकारों के समर्थन की अपनी नीति जारी रखेगा।
आसिम मुनीर की तारीफ, भारत को हराने का दावा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की प्रशंसा भी की। शरीफ ने उनके नेतृत्व का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत को पराजित किया। उनके बयान में मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष का भी संदर्भ आया।
ट्रम्प को फिर दिया युद्धविराम का श्रेय
शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने में ट्रम्प की पहल महत्वपूर्ण रही और इसी से समय रहते युद्धविराम हो सका। भारत का रुख इससे अलग रहा है। भारत लगातार कहता आया है कि संघर्ष रोकने की बातचीत दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे हुई थी और किसी तीसरे देश ने मध्यस्थता नहीं की।
चीन को बताया पाकिस्तान का मजबूत सहयोगी
शरीफ ने चीन के साथ पाकिस्तान के रिश्तों को भी अपने संबोधन में प्रमुखता दी। उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को हिमालय से भी ऊंचा बताते हुए चीन को पाकिस्तान का बड़ा मित्र बताया। उनके अनुसार मुश्किल परिस्थितियों में चीन पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।
अफगानिस्तान से आतंकवाद पर अपील
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देने की अपील की। शरीफ ने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
पाकिस्तान में पानी का संकट बढ़ने की चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। उसकी करीब 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली से मिलने वाले पानी पर निर्भर है। देश के मीठे पानी का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं 6 नदियों से जुड़ा है। सिंधु जल समझौते को लेकर पैदा हुए संकट का असर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही जा रही है। पाकिस्तान के प्रमुख सिंचाई ढांचे सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता सामने आई है। पानी का स्तर लगातार नीचे जाने से कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं।
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