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पुतिन से डीजल समझौते के बाद ट्रम्प ने क्यों रोका रूस पर प्रतिबंध? भारत के तेल और व्यापार पर क्या होगा असर

17 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पुतिन से डीजल समझौते के बाद ट्रम्प ने क्यों रोका रूस पर प्रतिबंध? भारत के तेल और व्यापार पर क्या होगा असर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना फिलहाल लागू नहीं होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून को रोकने का फैसला किया है, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाला संभावित दबाव टल सकता है।


इस निर्णय के पीछे अमेरिका के अपने आर्थिक हित भी अहम हैं। भारतीय दवाओं और सामान पर अतिरिक्त शुल्क से अमेरिकी आयातकों की लागत बढ़ सकती थी, जबकि महंगे तेल और पेट्रोल का असर नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों पर भी पड़ सकता है।


रूस पर सख्ती के कानून को ट्रम्प ने क्यों रोका?

ट्रम्प ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित फैसले पर रोक के आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने इस कदम को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया।


प्रस्तावित कानून का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को सीमित करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए मॉस्को को वित्तीय संसाधन जुटाने में मुश्किल हो।


इस कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की गुंजाइश थी। इसकी जद में भारत के साथ चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान भी आ सकते थे।


लिंडसे ग्राहम एक्ट पर कब हुआ था फैसला?

रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े बिल को अमेरिकी संसद के निचले सदन से सितंबर में मंजूरी मिली थी।


- 16 सितंबर 2026: हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बिल को 262-159 वोटों से मंजूरी दी गई।


- 18 सितंबर 2026: ट्रम्प ने लिंडसे ग्राहम एक्ट पर हस्ताक्षर किए।


- कानून पर हस्ताक्षर के बाद राष्ट्रपति को प्रतिबंध लगाने का निर्णय 30 दिनों के भीतर लेना था।


ट्रम्प ने इस समयसीमा के दौरान ही प्रतिबंधों और प्रस्तावित टैरिफ को लागू करने से राहत देने का फैसला किया।


भारत को राहत मिलने से अमेरिका को क्या फायदा हो सकता है?

भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने से सिर्फ भारतीय निर्यातकों पर असर नहीं पड़ता, बल्कि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत भी बढ़ सकती थी। इसके कई कारण हैं।


1\. जेनेरिक दवाओं की लागत बढ़ने का जोखिम टला

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवाओं का लगभग 40% हिस्सा भारत से आता है।


भारतीय दवाओं पर भारी शुल्क लगता तो अमेरिकी आयातकों की लागत बढ़ सकती थी। इसका असर दवा बाजार की कीमतों पर भी पड़ने का जोखिम था।


2\. भारतीय सामान पर शुल्क से अमेरिकी आयात महंगा हो सकता था

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका ने 2025 में भारत से 103.8 अरब डॉलर का सामान आयात किया।


इन उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगने से अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय सामान खरीदना महंगा हो सकता था। इसका असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ने की आशंका थी।


3\. व्यापारिक रिश्तों पर दबाव कम होने की संभावना

भारत और अमेरिका के बीच 2025 में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 239.6 अरब डॉलर रहा।


टैरिफ टकराव टलने से इस व्यापार पर तत्काल अतिरिक्त दबाव पड़ने का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, इससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की गारंटी नहीं मिलती।


4\. जवाबी टैरिफ की आशंका

यदि भारत अमेरिकी शुल्क के जवाब में अपने टैरिफ बढ़ाता, तो अमेरिकी निर्यातकों को भी नुकसान हो सकता था। यह एक संभावित आर्थिक जोखिम था, न कि तय परिणाम।


भारत के लिए रूसी तेल इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस आयात में रूस की हिस्सेदारी पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बनी हुई है।


अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार:

- भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी।

- रूस से प्रतिदिन औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा गया।


रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगने की आशंका भारत के लिए इसलिए अहम थी, क्योंकि इससे ऊर्जा आयात की लागत पर भारी दबाव पड़ सकता था।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए फैसले लेते समय तेल की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखता है।


भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठा चुका है। जानकारों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के कारण रूसी तेल की आपूर्ति घटने से वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने का जोखिम हो सकता है।


महंगे तेल और पेट्रोल की चिंता में अमेरिका

रूस पर प्रतिबंधों के मामले में ट्रम्प का फैसला ऐसे समय आया है, जब तेल की कीमतें अमेरिकी प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।


यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों से आपूर्ति प्रभावित होने और पश्चिम एशिया के संकट के बीच दुनिया भर में तेल महंगा होने का जोखिम बना हुआ है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें नीचे आएं, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके।


नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दे सरकार के प्रदर्शन को लेकर मतदाताओं की राय प्रभावित कर सकते हैं।


यदि रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में नुकसान होता है, तो संसद में उसका बहुमत समाप्त हो सकता है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में ऊर्जा की कीमतों का महत्व और बढ़ जाता है।


पुतिन के साथ डीजल समझौते पर भी विवाद

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने के समझौते की घोषणा की थी। इस व्यवस्था के तहत रूस से डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दी गई है।


इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया।


इसी सप्ताह अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की थी। रूस पर प्रतिबंधों के कानून को रोकने के फैसले की भी सांसदों ने आलोचना की।


अमेरिकी सांसदों ने फैसले पर उठाए सवाल

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला था। इसके बावजूद ट्रम्प ने इसे फिलहाल लागू नहीं करने का फैसला किया।


द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अमेरिकी सांसदों को पहले से आशंका थी कि राष्ट्रपति इस कानून के तहत रूस के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाएंगे।


भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर पड़ेगा?

भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते के पहले चरण की बातचीत अंतिम चरण में है। भारत चाहता है कि उसे दूसरे देशों की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच मिले और टैरिफ व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे।


रूस से तेल खरीदने पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क का खतरा टलने से व्यापार वार्ता पर पड़ने वाला संभावित दबाव कम हो सकता है। इससे समझौते को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है, लेकिन डील जल्द पूरी होगी या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

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